तराई क्षेत्र के साथ कैलाली और कंचनपुर जिले के थारू समुदाय में करीब सवा माह से मनाया जाने वाला होली पर्व खकरेड़ा की पूजा और फगुआ मांगने की रस्म के साथ संपन्न हो गया।
भारत और नेपाल के तराई क्षेत्र के साथ कैलाली और कंचनपुर जिले के थारू समुदाय में करीब सवा माह से मनाया जाने वाला होली पर्व खकरेड़ा की पूजा और फगुआ मांगने की रस्म के साथ संपन्न हुआ। नेपाल में इसको लेकर सुदूर पश्चिम प्रदेश सरकार ने सरकारी अवकाश भी दिया।
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नेपाल के सुदूर पश्चिम प्रदेश के कैलाली, कंचनपुर जिलों के थारू समुदाय में होली पर्व के माघ माह की पूर्णिमा के दिन होली के प्रतीक पुतला की स्थापना कर जिंदा होली की शुरुआत की जाती है। इसमें थारू गांवों में होली के गीत व नाचगाना शुरू हो जाता है। होली के एक सप्ताह बाद थारू मरी होली खेलते हैं। जिसका समापन खकरेड़ा वाले दिन होता है।
थारू होली के समापन पर कैलाली व कंचनपुर जिलों के साथ लखीमपुर खीरी जिले के गौरीफंटा के कजरिया, सेड़ाबेड़ा, सूंड़ा, चंदनचौकी समेत थारू गांवों में परंपरानुसार ढंग से गांव के बाहर सड़क पर आसपास की बाजार में फगुआ मांगने की रस्म की गई। गांव के चौराहे पर पूजा-अर्चना कर होली पर्व समापन हुआ।