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थारू जनजाति भी सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित

Tue, 19 Jul 2016 11:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
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tharu - फोटो : amar ujala
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कार्य मंत्रालय भारत सरकार पहली बार कराई जांच, 12 बच्चे पॉजिटिव मिले
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चंदनचौकी स्थित एकलव्य मॉडल स्कूल में कैंप लगाकर विशेषज्ञों ने की जांच
जनजाति स्कूलों के प्रधानाचार्यों और छात्रों को प्रशिक्षित कर बनाया मास्टर ट्रेनर
सूज जाते हैं पैर, इस बीमारी का इलाज केवल अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण से संभव
आदिवासियों में पाई जाने वाली आनुवंशिक बीमारी सिकल सेल एनीमिया से थारू जनजाति भी पीड़ित है। कार्य मंत्रालय भारत सरकार और निदेशालय जनजाति विकास विभाग की ओर लगाए गए जांच शिविर में 12 बच्चों में सिकल सेल एनीमिया के लक्षण मिले हैं। इस बीमारी से धमनियों में रक्त प्रवाह रुक जाता है और उस स्थान पर दर्द भरी सूजन आ जाती है। इस बीमारी का इलाज केवल अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण से ही संभव है।
यह पहला मामला है जब थारू जनजाति के लोगों में सिकल सेल एनीमिया के लक्षण मिले हैं। बच्चों में सिकल सेल एनीमिया के लक्षण मिलने के बाद प्रदेश करे सभी थारू बाहुल्य गांवों में जांच होगी। लखीमपुर खीरी में ही 25 थारू बाहुल्य गांवों की आबादी 51 हजार से अधिक हैं। इन सभी की जांच मास्टर ट्रेनर करेंगे। जांच के लिए मध्यप्रदेश के जबलपुर से आई टीम ने सभी थारू स्कूलों के प्रधानाचार्यों, दो-दो छात्रों समेत 21 लोगों को मास्टर ट्रेनर के तौर पर प्रशिक्षित कर जांच के लिए उन्हें किट दी है।  परियोजना अधिकारी यूके सिंह ने बताया कि मास्टर ट्रेनर्स को किट मुहैया कराई गई, जिसकी मदद से समस्त थारुओं की जांच कराई जाएगी। मास्टर ट्रेनर्स से ब्लड सैंपल की जांच भी कराई गई है। जांच में सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित मिले 12 बच्चों के माता-पिता का भी ब्लड सैंपल लिया गया। विशेषज्ञ इसे जबलपुर ले गए हैं। वहां पर जांच के बाद इसकी कंफरमेशन रिपोर्ट तैयार होगी।
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जबलपुर से आए विशेषज्ञ
कार्य मंत्रालय भारत सरकार और निदेशालय जनजाति विकास विभाग ने एकीकृत जनजाति विकास परियोजना चंदनचौकी के संयुक्त प्रयास से सिकल सेल एनीमिया के प्रशिक्षण के लिए दो दिवसीय कैंप लगाया गया। सहायक निदेशक प्रियंका वर्मा के नेतृत्व में क्षेत्रीय जनजातीय और विज्ञान अनुसंधान केंद्र (एनआईआरटीएच) जबलपुर के विशेषज्ञ पुरुषोत्तम पटेल, अनिल ग्वाल और परियोजना अधिकारी यूके सिंह ने कैंप में सिकल सेल एनीमिया के बारे में जानकारी दी। थारू बच्चों को मास्टर ट्रेनर के तौर पर प्रशिक्षण दिया और सैंपल की जांच कराई गई। इस कैंप में कैंप में पलिया, निघासन के चिकित्सा अधिकारी, थारू गांवों के प्रधान शामिल हुए। इसके अलावा बलरामपुर, महाराजगंज, श्रावस्ती, बिजनौर के थारू स्कूलों से आए प्रतिनिधियों ने कैंप में प्रतिभाग किया।
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एचबीएस हीमोग्लोबिन से होती है बीमारी
लखीमपुर खीरी। सिकल सेल एनीमिया के बारे में विशेषज्ञ पुरुषोत्तम पटेल ने बताया कि रक्त में लाल रंग का प्रोटीन होता है, जिसे हीमोग्लोबिन कहते हैं। सामान्य व्यक्ति के रक्त में एचबीए, एचबीएफ और एटू यानी तीन प्रकार का हीमोग्लोबिन पाया जाता है। कुछ व्यक्तियों में इनसे अलग प्रकार का हीमोग्लोबिन पाया जाता है, जिसे एचबीएस (सिकल सेल एनीमिया) कहते हैं। यह बीमारी पैदा करता है, क्योंकि किसी कारणवश शरीर में आक्सीजन की कमी होने पर हीमोग्लोबिन लाल रक्त कणों के अंदर छोटे-छोटे टुकड़ों में बदल जाता है। इससे गोल आकार की कणिकाएं हंसिए के आकार वाली हो जाती हैं। इससे धमनियों में रक्त का प्रवाह रुक जाता है और शरीर के जिस हिस्से में रक्त पहुंच नहीं पाता वहां दर्द और सूजन आ जाती है। इस बीमारी का पूरी तरह से इलाज सिर्फ अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण से ही संभव है। 
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