गोवा लोकोत्सव-2016 में रविवार रात त्योहारों का माहौल दिखा। थारू द राइजिंग परिसर में लखीमपुर-खीरी से पहुंचे युवक-युवतियों ने थारू समुदाय में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहारों दिवाली और दशहरा का मंचन किया।
थारू युवक-युवतियों की प्रस्तुतियों ने परिसर में मौजूद दर्शकों का मन मोह लिया। थारू परिसर में दशहरा की शुरुआत गुरूवा ने पधना और पधनी को टीका लगाकर की। टीके की रस्म में स्थानीय निवासियों और विदेशी पर्यटकों ने भी भागीदारी की। दशहरा के मंचन में गुरूवा की भूमिका अदा कर रहे लक्ष्मी चौधरी पर जब देवता आए तो उस समय के उनके अभिनय और लोक परंपरा के अद्भुत दृश्य देख लोग दंग रह गए। दशहरा और दिवाली के रंग दिखाने के लिए थारू द राइजिंग परिसर को दीपों से रोशन किया गया।
थारू संस्कृति और जीवन शैली से लोगों का रू-ब-रू कराए जाने के लिए थारू महिलाओं और पुरुषों ने पारंपरिक लोक नृत्य और गीत प्रस्तुत किए। इसके अलावा साखू के जंगलों से थारूओं की परंपरागत तरीके से शहद निकालने की कला ने भी पर्यटकों को खूब आकर्षित किया। थारू द राइजिंग परिसर में मनाए जाने वाले दशहरा उत्सव में मुख्य यजमान की भूमिका डॉ. ओपी राय, यूके सिंह, अवनीश्वर, दीपा ने निभाई। जबकि पधना की भूमिका बजरंगी तथा पधनी की भूमिका आरती राना ने निभाई।
कार्यक्रम के बीच-बीच में त्योहार से संबंधित तथ्यों की रोचक ढंग से जानकारी दर्शकों तक पहुंचाने का कार्य डॉ. राकेश तिवारी ने किया। उल्लेखनीय है कि डीएम किंजल सिंह ने स्थापित परंपरा से हटकर वंचित और मुख्य धारा से हटकर जीवन यापन करने वाली जनजाति के विकास, प्रोन्नयन और संरक्षण के लिए किए जाने वाले प्रयास से थारू संस्कृति को देश विदेश में पहचान मिली है।