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ई-मार्केटिंग से जुड़ेगा थारू हस्तशिल्प

Sun, 25 Oct 2015 07:59 PM IST
लखीमपुर खीरी
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अब थारुओं की मेहनत जाया नहीं जाएगी। मेहनत कर जो हस्तशिल्प उनकी बहू-बेटियां तैयार करती थीं, अब उन्हें उसकी पूरी कीमत भी मिलेगी और सरकार की शाबासी भी। डीएम किंजल सिंह के थारू गांवों को गोद लेने के बाद से उनके द्वारा बनाए गए हस्तशिल्प का महत्व भी बढ़ गया है। द राइजिंग कार्यक्रम के जरिए डीएम ने वेबसाइट, ट्यूटर, फेसबुक और अपनी आईडी पर थारू हस्तशिल्प को अपलोड कराया तो इसे नई पहचान मिल गई। कई कंपनियां थारुओं के दरवाजे पर उनके सामान की खरीदारी करने और इसे ई-मार्केटिंग से जोड़ने के लिए आ चुकी हैं।
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शनिवार और रविवार का दिन थारू हस्तशिल्पियों के लिए किसी सौगात से कम नहीं था। दिवाली करीब है। थारू, रोशनी के इस पर्व को खास उत्साह से मनाते हैं। करीब चार महीने पहले से अच्छी आमदनी के उद्देश्य से थारुओं ने अपनी हस्त कौशल का इस्तेमाल कर जो सामान बनाया है, उनमें शोपीस, डलिया, मूंगे और रंग-बिरंगे धागों से बनाए गए आभूषण, टोकरियां, हैंडबैग, दरी और पांवदान शामिल हैं। थारुओं को उम्मीद थी कि इस बार उनकी दिवाली अच्छी होगी। डीएम के प्रयास से थारुओं की इस उम्मीद में और चमक आ गई है।  
शनिवार को ख्याति प्राप्त ई-मार्केटिंग कंपनी लालटेन डाट कॉम के मनीत गोहिल चंदनचौकी पहुंचे। उन्होंने हैंडीक्राफ्ट और फूड प्रोडक्ट्स को ई-मार्केटिंग से जोड़ने का इरादा जाहिर किया। इससे पूर्व भी मुंबई और बंगलूरू की कई कंपनियां यहां आकर थारुओं द्वारा बनाए गए सामान का जायजा ले चुकी हैं। एक अधिकारी ने बताया कि होलसेल होम मार्केट से जुड़ी वी-मार्ट के लोग भी संपर्क में हैं। डीएम किंजल सिंह कहती हैं कि जब उन्होंने थारुओं की शिल्पकला के नमूने देखे तो उन्हें लगा कि वे बेहतर तभी कर पाएंगे, जब उन्हें आधुनिक बाजार से जोड़ा जाए। डीएम का कहना है कि वह पूरा प्रयास करेंगी कि थारू शिल्प का महत्व बढ़े और देश दुनिया के बाजार थारू शिल्प से रूबरू हों।
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