लखीमपुर खीरी। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से आए आदेश के बाद पुराने शिक्षकों की धड़कनें बढ़ गईं हैं। बताया जा रहा है कि साल 2011 से पहले के भर्ती शिक्षकों को टीईटी अनिवार्य रूप से उत्तीर्ण करनी होगी। शिक्षकों को दो बार ही परीक्षा में शामिल होने का मौका दिया जाएगा। फेल होने वाले शिक्षकों के पास नौकरी छोड़ने और पूर्ण रूप से सेवानिवृत्त होने का ही विकल्प बचेगा। इस आदेश से शिक्षकों के चेहरे पर परेशानी साफ देखने को मिल रही है।
जिले में 3106 परिषदीय स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो साल 2011 से पहले ऐसे सैकड़ों शिक्षक सेवा में आए जिन्होंने टीईटी उत्तीर्ण नहीं की थी, क्योंकि 2011 से पहले उक्त परीक्षा होती ही नहीं थी। शिक्षकों को हर दस साल में वेतनमान में बढ़ोत्तरी का लाभ तो मिला, लेकिन पदोन्नति नहीं मिली।
इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नया आदेश जारी किया। इस आदेश को शिक्षक संगठन के पदाधिकारी न्याय संगत नहीं मान रहे हैं। पदाधिकारियों का कहना था कि कोर्ट को एक बार पुन: मंथन करने की जरूरत है ताकि पुराने शिक्षकों का कहीं से अहित न हो सके। फिलहाल यह आदेश शिक्षकों के गले नहीं उतर रहा है।
-शिक्षक बोले-आदेश पुराने शिक्षकों के हित में नहीं
साल 2011 से पहले टीईटी अनिवार्य नहीं थी, चूंकि भर्ती हुई तो शिक्षक स्कूल पढ़ाने पहुंचे। यह आदेश पुराने शिक्षकों के लिए तो बिल्कुल भी हितकर नहीं होगा। इस पर विचार किया जाना जरुरी है। - आशीष श्रीवास्तव शिक्षक
अभी आदेश पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, जब पूरा आदेश स्पष्ट हो जाएगा तभी कुछ कहना संभव होगा। बाकी टीचर तो पढ़ाते हैं, जरूरत पड़ेगी तो नौकरी में सेवाएं देने के लिए टीईटी पास ही कर लेंगे। - संजीव त्रिपाठी, शिक्षक
आशीष श्रीवास्तव