आतंकवाद का कोई रिश्ता इस्लाम से नहीं है। 1400 साल से इस्लाम आतंकवाद के खिलाफ जंग लड़ रहा है, जिसका सबूत करबला में नवासा-ए-रसूल हजरत इमाम हुसैन दे चुके हैं। उन्होंने अपने बच्चों, भाइयों, साथियों की कुर्बानी देकर दुनिया वालों को बता दिया कि इस्लाम भाईचारे, इंसानियत का सबक देता है। जुल्म करने की इजाजत नहीं देता है। यह बात मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना सैय्यद कल्बे जव्वाद ने मजलिस को खिताब करते हुए कही।
मौलाना कल्बे जव्वाद औरंगाबाद करबला में मनाए जा रहे शहीदों का चेहलुम के मौके पर पहुंचे थे। जिसकी मजलिस नवाब नाजिम हुसैन के अजाखाने में आयोजित की गई थी। इस दौरान मौलाना का खिताब सुनने काफी संख्या में पुरुष और महिलाएं पहुंचे।
मौलाना ने समाज और कौम को बांटने वालों की आगाह करते हुए बताया कि दुनिया का कोई धर्म आपस में बांटने और लड़ाने का सबक नहीं देता है। यदि कोई समाज को बांटने का काम करता है तो वह केवल इंसानी फितरत है, न कि यह उसका धर्म सिखा रहा है।
मजलिस से पहले जनाब अंजार सीतापुर, जनाब कंबर पीहानवी ने कलाम पेश किया। मजलिस के बाद अजाखाने से मातमी जुलूस और अलम बरामद हुआ। जिसमें मकामी अंजुमनों ने नौहाख्वानी और सीनाजनी की, इसके बाद जुलूस करबला में समाप्त हुआ। मजलिस में लखीमपुर, सीतापुर, लखनऊ, हरदोई, इलाहाबाद से आए मेहमानों ने शिरकत की। इस दौरान नवाब कल्बे हैदर, नवाब कल्बे हसन, नदीम अब्बास, रिजवान हैदर रिजवी, आदिल जैदी इलाहाबादी आदि ने शिरकत की।