लखीमपुर खीरी। टेरर फंडिंग मामले के आगे पुलिस क्राइस्ट चर्च पर हमले के मास्टरमाइंड कमरू और हाथ नहीं आए उसके साथियों को तलाश करना ही भूल गई। यही वजह है कि पुलिस ने खुलासे के 19 दिन बाद भी इन आरोपियों की गिरफ्तारी का कोई प्रयास नहीं किया। इससे क्राइस्ट चर्च पर हुए हमले के कई सवाल अभी भी अनसुलझे हैं।
पुराने एसपी बंगला के निकट मोहल्ला कपूरथला स्थित क्राइस्ट चर्च पर वर्ष 2016 में 17 सितंबर 16 की रात दो धमाके हुए थे। विवेचक मोहम्मद रफी आलम ने करीब आठ महीने बाद फाइनल रिपोर्ट लगाकर मामले की जांच बंद कर दी थी। एटीएस लखनऊ ने मौके से मिले अवशेषों में पोटेशियम क्लोरेट, क्लोराइड, नाइट्रेट और सल्फर मिलने पर स्वत: हमले को संज्ञान लिया और इसकी जांच शुरू की। एटीएस ने अपनी जांच में धमाके में शामिल थाना धौरहरा के गांव सिसैया कलां निवासी जामिन, रामलाल भार्गव और थाना निघासन के गांव हरसिंगपुर निवासी सज्जन अली के नाम खोले थे। इसके अलावा कमरू, गुड्डू निवासी बहराइच और अफजल लखीमपुर का नाम खोला था, लेकिन ये तीनों आरोपी किस गांव के रहने वाले हैं। इसकी जानकारी एटीएस भी नहीं जुटा पाई थी। अपनी जांच रिपोर्ट एटीएस ने कुछ समय पहले लखीमपुर जिला पुलिस को भेज दी थी।
चार अक्तूबर को पुलिस ने एटीएस की रिपोर्ट पर नामजद रामलाल भार्गव और सज्जन अली को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मामले की विवेचना सदर कोतवाली की पुलिस चौकी जेल गेट के प्रभारी निरीक्षक को सौंपी थी। दोनों आरोपियों के जेल जाने के बाद पुलिस जांच की गति कुछ दिन तक तो ठीक रही, लेकिन फिर वह पुराने रास्ते पर आ गई। एसपी पूनम ने कमरू के नेपाल भाग जाने का दावा करते हुए नेपाल पुलिस की मदद लेने की बात कही थी। इसी बीच नेपाल से टेटर फंडिंग करने वाले गिरोह का 11 अक्तूबर को खुलासा हो गया। पुलिस इस खुलासे के बाद बहराइच निवासी मास्टरमाइंड कमरू, गुड्डू और नामजद अन्य दो साथियों की तलाश भूल गई। चर्च पर हमले के दो आरोपियों की गिरफ्तारी को हुए 19 दिन बीत गए, लेकिन पुलिस ने फरार आरोपियों और मास्टरमाइंड की तलाश नहीं की।