लखीमपुर खीरी। जिले में होने वाले मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह का आयोजन एक बार फिर अफसरों की लापरवाही की भेंट चढ़ गया। अफसरों ने बिना जांच-पड़ताल किए एक रामपुर की फर्म को सामान उपलब्ध कराने का ठेका दे दिया।
बाद में पता चला कि वह टेंडर मानकों में नहीं है। उसका टर्नओवर काफी कम है। सीडीओ ने जांच कराई तो मामला सही पाया गया। ऐसे में उस फर्म का टेंडर निरस्त करते हुए विभागीय अफसर के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा।
जिले में सामूहिक विवाह का लक्ष्य पांच माह पहले ही मिल गया था। 1791 लक्ष्य के सापेक्ष बजट भी जारी कर दिया था। विवाह नवंबर में कराने की तैयार थी, लेकिन टेंडर प्रक्रिया में लापरवाही होने से उस समय विवाह नहीं हो सके।
तब तक विवाह के शुभ मुहूर्त निकल गए। लक्ष्य और बजट समय पर मिलने के बाद भी विवाह न होने पर वर-वधु सहित उनके परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
उस दौरान मामला काफी सुर्खियों में भी रहा। लापरवाही में संबंधित अफसरों की डांट फटकार भी लगाई गई थी। बाद में तय हुआ कि जनवरी 2025 के शुभ मुहूर्त पर विवाह का आयोजन होना है। ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया में दो फर्म का चयन हुआ।
एक सामान उपलब्ध कराने और दूसरी टेंट सहित अन्य व्यवस्थाओं के लिए चयन किया गया। सामान उपलब्ध कराने के लिए रामपुर के गीत गोविंद रिजार्ट को टेंडर मिला था, जो मानक में न होने पर इसका टेंडर निरस्त कर दिया गया।
28 लाख टर्नओवर कम
सामूहिक विवाह में सामान उपलब्ध कराने के लिए टर्नओवर 89.50 लाख तक होना चाहिए, लेकिन विभागीय अफसरों ने 61.50 लाख वाले टर्नओवर रामपुर गीत गोविंद को ठेका दे दिया। शिकायत पर सीडीओ ने जांच कराई तो फर्म का टर्नओवर कम पाया गया। ऐसे में तत्काल प्रभार से फर्म का टेंडर निरस्त कर दिया गया।
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रामपुर की गीत गोविंद फर्म को टेंडर दिया गया। बाद में पता चला कि वह फर्म मानक में नहीं है। उसका टर्नओवर कम है। ऐसे में फर्म का टेंडर निरस्त कर नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह लापरवाही विभागीय अफसरों की है। ऐसे में जिला समाज कल्याण अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।
-अभिषेक कुमार, सीडीओ