तहसील प्रशासन के खिलाफ वकीलों के आंदोलन ने गति पकड़ ली है। वकीलों ने बृहस्पतिवार से तहसील प्रशासन के खिलाफ क्रमिक अनशन शुरू कर दिया, इस दौरान उन्होंने अधिकारियों के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली।
इस मौके पर वकीलों का कहना था कि जब उनके साथ अधिकारियों का यह रवैया है तो फिर आम जनता के साथ क्या स्थिति होगी, समझा जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे अधिकारियों को तहसील में रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने वर्तमान अधिकारियों के तबादले की पुरजोर मांग की। वकीलों के आंदोलन को भाकपा माले, किसान मजदूर संगठन ने भी अपना समर्थन दिया। भाकपा माले का समर्थन पत्र ब्लाक सचिव कमलेश राय और राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन का समर्थन पत्र नयरुल इस्लाम खान ने वकीलों को सौंपा।
श्रीष द्विवेदी, रामप्रकाश पाल, अफसर अली, मधुसूदन तिवारी, विष्णु शुक्ला, जावेद अख्तर, भगीरथ शाक्य, महेंद्र अवस्थी, इंतजार हुसैन खान, अजीत सिंह, रमा शंकर पांडे, रामंचद्र गौतम, परविंदर भार्गव, जेपी मेनरो, प्रदीप यादव, शैलेंद्र सिंह, धर्मराज शाक्य, सतीश कुमार, राजेंद्र सिंह, विशाल श्रीवास्तव, दिनेश दीक्षित, नईम अहमद खान, गुलाम वारिस, जय प्रकाश चौबे, डॉ. फजल अहमद, अरविंद गुप्ता, रविकांत, रामनरेश, कमाल इदरीशी, बृजेश गुप्ता, सुनील शुक्ला, नरेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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लेखपालों ने लगाए कई आरोप
पलियाकलां। लेखपालों की बैठक में तहसील के वकीलों पर कई आरोप लगाए गए। लेखपालों ने बैठक कर निंदा प्रस्ताव भी पारित किया।
तहसील सभागार में लेखपाल संघ के अध्यक्ष अजय कुमार की अध्यक्षता में बैठक हुई। लेखपालों का आरोप था कि वकीलों ने एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और लेखपालों से अभ्रदता की, जो निंदनीय है। उनका कहना था कि अधिकारियों के तबादले की वकीलों की मांग भी निंदनीय है। आरोप लगाया कि वकीलों ने पूर्व में यहां तैनात एसडीएम अमृतलाल साहू, रामचंद्र, बीपी खरे, विजय बहादुर के साथ धक्का-मुक्की कर उन्हें अपमानित किया था और पूर्व में तैनात तहसीलदार रामभवन तिवारी को वाहन से खींचकर अपमानित किया गया।
इस मौके पर लेखपाल संघ के महामंत्री अरविंद कुमार, सर्वेश कुमार, लावण्य कुमार, विश्नु दयाल, भूपेंद्र सिंह, शैलेंद्र सिंह, विजय भार्गव, रमाकांत वर्मा, केशव चंद, ओमप्रकाश आदि तमाम लेखपाल मौजूद रहे।