लखीमपुर खीरी। जिले को मिले ढाई लाख मीट्रिक टन धान खरीद के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अधिकारी दिन-रात एक किए हैं। इसके बाद भी केंद्रों पर किसान नहीं पहुंच रहे हैं। इक्का-दुक्का किसान पहुंचते भी हैं तो कई दस्तावेजों को पूरा करने में तमाम समय खपा दे रहे हैं। ऐसे में किसान आढ़त पर जाकर कम दामों में धान बेंच रहे हैं। इधर, अधिकारी खरीद बढ़ाने को लेकर आढ़तों का धान केंद्रों पर तुलवा रहे हैं।
तीन अक्तूबर से इस बार धान खरीद शुरू हुई थी। जिले के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अधिकारी जुट गए, लेकिन इसके बाद भी किसान क्रय केंद्रों तक नहीं पहुंचे। हाल यह हुआ कि दो महीने का समय बीत जाने के बाद भी लक्ष्य पूर्ति से काफी दूर है। अभी तक 8298 किसानों से 71,367 मीट्रिक टन की खरीद हो सकी है।
मंडी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि देर शाम एक निर्धारित कमरे में बैठक में किसानों का फर्जी तरीके से सत्यापन कराया जाता है। इसी के सहारे लक्ष्य को पूरा किया जा रहा है।
सूत्र बताते हैं कि आढ़तों पर किसानों से खरीदा जा रहा धान देर शाम क्रय केंद्रों पर तुल जाता है। शातिर कर्मचारी खुद को बचाने के लिए फर्जी कागज तैयार कर लोगों को थोड़ा लालच देकर उनके दस्तावेज लेते हैं। इतना ही नहीं सत्यापन के दौरान उन्हें बुलाकर सत्यापन भी करा लेते हैं। यह कार्य हर रोज किया जा रहा है। अधिकारियों को इस बात का संज्ञान होने के बाद भी सभी आंखें मूंदे हैं।
दिन में सन्नाटा, फिर भी शाम तक होती है खरीद
अमूमन देखने पर दिन में क्रय केंद्रों पर एकाध ही किसान पहुंचता है, लेकिन शाम तक पोर्टल पर अच्छी खासी खरीद दर्शायी जा रही है। बताते चलें कि आढ़तों पर 16 सौ से लेकर 18 सौ रुपये तक की कीमत में धान की खरीद की जाती है। वहीं धान देर शाम क्रय केंद्रों पर तुलवाकर 2389 रुपये के मूल्य से बिक्री कर दिया जाता है। इसमें आढ़तियों के साथ ही कर्मचारियों का भी कमीशन तय रहता है।
नियमत: सत्यापन के बाद ही होनी चाहिए खरीद
क्रय केंद्रों पर किसी भी फसल की खरीद को लेकर पहले किसानों के कागजों का सत्यापन कराया जाता है। सत्यापन में सभी कुछ सही होने के बाद ही खरीद की जाती है लेकिन सांठगांठ के चलते आढ़तों से खरीदा गया धान क्रय केंद्रों पर बिक्री दिखाई जा रही है। साथ ही बाद में कागजों का फर्जी तरीके से सत्यापन कराया जा रहा है।
वर्जन
कभी-कभी सत्यापन का काम दूसरे दिन होता है। लोग इसे फर्जी बता रहे हैं, जबकि ऐसा कुछ नहीं है। कागज सत्यापन के बाद ही खरीद की जाती है।
आरडी प्रसाद, एएमओ