चार मार्च बुधवार को लोग होली के रंगों में सराबोर होंगे। लोग इस दिन को खास बनाने के लिए एक-दूसरे को रंग-बिरंगे गुलाल लगाते हैं। पहले फूलों व हर्बल रंगों से खेली जाने वाली होली में अब धड़ल्ले से रसायनयुक्त व सिंथेटिक रंगों का इस्तेमाल किया जा रहा है। बाजार में सिंथेंटिक रंगों की भरमार है। यह रंग सेहत के लिए काफी खतरनाक होते हैं।
इन रंगों में लेड ऑक्साइड, क्रोमियम आयोडाइड, कॉपर, सल्फेट, सीसा और एल्युमीनियम ब्रोमाइड जैसे रसायन मौजूद होते हैं। जो सेहत से जुड़ी कई समस्याओं का कारण बन सकते हैं। कई बार सिंथेंटिक रंग से आंखों व त्वचा को नुकसान होता है। सांस रोगियों के लिए भी इन रंगों से काफी दिक्कत हो जाती है। चिकित्सकों का कहना है कि सिंथेटिक रंगों की जगह हर्बल रंगों का इस्तेमाल करना चाहिए।
रंग खेलते समय इन बातों का रखें ध्यान
- रंग खेलने से पहले शरीर पर नारियल का तेल लगाएं।
- शरीर को ढकने के लिए पूरे कपडे़ पहनें।
- त्योहार पर घर की बनी चीजें खाएं।
- शरीर को अधिक देर तक भीगा न रखें।
- बीच-बीच में पानी पीते रहें।
- सांस रोगी व गर्भवती महिलाओं को रंगों से दूरी बनानी चाहिए, क्योंकि मुंह में रंग जाने से विकासशील भ्रूण के लिए खतरा हो सकता है।