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सिर्फ कहने को ओडीएफ, हकीकत में शौचालयों बने नहीं, बने हैं तो भरा है सामान

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जर्जर शौचालय के अंदर खा पल्ला। - फोटो : LAKHIMPUR
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गुलरिया (लखीमपुर खीरी)। ब्लॉक बिजुआ की ग्राम पंचायत मलूकापुर कला अभिलेखों में शत प्रतिशत ओडीएफ घोषित है पर हकीकत में हालात इसके विपरीत हैं जो स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत अभियान की पोल खोलने के लिए काफी हैं। यहां या तो शौचालय बने नहीं हैं, बने हैं तो उनमें सामान भरा है। लाभार्थियों का आरोप है कि उन्हें शासन से मिलने वाली राशि देने के बजाय सिर्फ कागजों पर हस्ताक्षर करा लिए गए। ऐसे में निर्धारित राशि न मिलने से वह शौचालयों को पूरा नहीं करा सके।
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शौचालय में भरा र्है इंधन और कबाड़
सियाराम राज के शौचालय में ईंधन तथा अन्य कबाड़ भरा हुआ है, दरवाजा टूटा हुआ है। सियाराम का आरोप है प्रधान ने ठेके पर आधा-अधूरा शौचालय बनवाया है, आज तक इसका प्रयोग नहीं किया जा सका है।
यहां तो सीट ही नहीं
रामभजन के घर में बनाए गए शौचालय में सीट ही नहीं हैं, दरबाजे के पल्ले भी नदारद हैं। रामभजन ने बताया कि प्रधान से साढ़े चार हजार रुपये मिले थे, उससे जितना बन सकता था शौचालय बना। एक दिन भी शौचालय का प्रयोग नहीं कर पाए, घर के सभी सदस्य बाहर खेतों में जाते हैं।
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प्रधान ने नहीं दिया पूरा पैसा
रिक्खी सोनी ने बताया कि प्रधान ने पांच हजार रुपये दिये थे, उसी से आधा-अधूरा शौचालय बना है।
हमारे पास ग्राम पंचायत के बहुत सारे कार्य हैं। लोगों की समस्याओं का समाधान भी करना है। शौचालयों की हालत के बारे में ब्लॉक के अधिकारियों से बेहतर जानकारी मिल सकती है। उन पर लगाए आरोप गलत हैं।
-बोडसिंह, प्रधान मलूकापुर कलां
अभी तीन महीने पहले ही ग्राम पंचायत में ज्वाइन किया है। यहां पहले राजेंद्र कुमार ग्राम विकास अधिकारी थे, उसके कार्यकाल में शौचालय बने हैं। गांव के लोग शौचालय तो बनवा लेते हैं लेकिन उनका दुरुपयोग करते हैं। शिकायतें मिली हैं, गांव जाकर देखूंगा।
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-यशपाल कुमार, ग्राम पंचायत अधिकारी मलूकापुर
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