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लावारिस पशुओं ने किसानों और राहगीरों की नाक में किया दम, जिम्मेदार पड़े बेदम

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मितौली में सड़क पर लड़ते लावारिस पशु - फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। लावारिस पशुओं की बढ़ती संख्या से किसानों में त्राहि-त्राहि मची है, तो वहीं सड़कों पर इनके झुंड राहगीरों/वाहन चालकों के लिए खतरे का सबब बने हुए हैं। दिन में पशुओं के झुंड खेतों की ओर रुख कर लेते हैं, लेकिन शाम होते ही सड़कों पर इकट्ठा हो जाते हैं। उधर, गोआश्रय स्थलों में इन्हें भेजने के बजाय जिम्मेदार नगर निकाय और ग्राम पंचायतों के अधिकारी/जनप्रतिनिधि आंखे मूंदे बैठे हैं तो जिला प्रशासन भी विकराल होती समस्या के आगे असहाय बना हुआ है, जबकि किसान और उनसे जुड़े संगठन कई बार लावारिस पशुओं को गोआश्रय स्थलों में भेजने की मांग कर चुके हैं।
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जनपद में 36 गोवंश आश्रय स्थल संचालित हैं, जिनमें 9455 पशु रखे गए हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री जनसहभागिता योजना के तहत 1804 पशुओं को लोगों में बांटा गया है, जिन्हें पशुओं को चारा खिलाने के लिए 30-30 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दिए जा रहे हैं। इसके अलावा 10 गोआश्रय स्थल निर्माणाधीन हैं। लावारिस पशुओं को पकड़कर गोआश्रय स्थल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी नगर निकाय/ग्राम पंचायतों की है, लेकिन दोनों संस्थाएं इस समस्या की ओर से आंखे बंद किए हैं। जबकि पशु पालन विभाग द्वारा गोआश्रय स्थलों के संचालन के लिए ग्राम समितियों/नगर निकायों को प्रत्येक पशु की देखभाल के लिए 30 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से धनराशि भी दी जा रही है। इसके अलावा सामाजिक संगठनों के सहयोग से चारे की व्यवस्था कराई जाती है और गोआश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाने की कवायद भी चल रही है। इधर, पशुपालन विभाग के अधिकारियों का दावा है कि नए बनाए जा रहे 10 गोआश्रय स्थलों के चालू होने पर समस्या का समाधान हो जाएगा।
लावारिस पशुओं को पकड़वाकर उन्हें गोआश्रय स्थलों में भेजने का काम पंचायतों और नगर निकायों को करना है। पशुपालन विभाग द्वारा गोआश्रय स्थलों में बीमार पशुओं का समय से इलाज और टीकाकरण कराने का काम किया जा रहा है।
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-मुकेश गुप्ता, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
मचान पर रातभर जागकर पशुओं से फसल बचा रहे किसान
तिकुनियां। बाढ़ग्रस्त क्षेत्र के करीब 50 गांवों में लावारिस पशुओं के झुंड खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे फसलों की रखवाली के लिए किसानों का दिन और रात खेत पर ही बीत रहा है। रात में खेतों पर रुकने के लिए किसानों ने मचान बना रखे हैं। किसानों का कहना है क्षेत्र में प्रशासन द्वारा एक भी गोशाला का निर्माण नहीं कराया, गया है।
लावारिस पशुओं के झुंड खेतों में घुसकर फसल को नष्ट कर रहे हैं, जिससे किसानों को बड़ा नुकसान हो रहा है।
-राम मनोहर मिश्रा, पूर्व संचालक, सहकारी समिति
खेतों में फसलों को बचाने के लिए रस्सियां बांधी हैं, लेकिन लावारिस पशु खेत में घुस जाते हैं। फसलों को खाकर पेट भरते हैं। जानकारी मिलने पर जब तक भगाते हैं, तब तक काफी नुकसान हो जाता है।
- रामकिशोर वर्मा, किसान
पशुओं से फसलों को कैसे बचाया जाए समझ नहीं आ रहा। दिन-रात खेतों में बिताना पड़ रहा है, जिससे काफी किसान बीमार हो रहे हैं।
-विजय वर्मा, किसान
लावारिस पशुओं से किसानों की फसलों का उत्पादन घटता जा रहा है। गोशाला निर्माण के लिए प्रशासन को कई बार कहा जा चुका है। क्षेत्र के किसानों में रोष में हैं।
-राजेंद्र सिंह, किसान
लखीमपुर-मैगलगंज मार्ग पर लावारिस पशुओं के कई झुंड
मितौली। कस्बे में पिछले कई महीनों से लावारिस पशुओं की संख्या बढ़ गई है, जो खेतों से लेकर सड़क तक बसेरा बनाए हैं। पशुओं की चपेट में आने से सड़क हादसे हो रहे हैं। लखीमपुर-मैगलगंज मार्ग पर शाम होते ही लावारिस पशुओं के कई झुंड रात बिताने के लिए डेरा डाल देते हैं। जगह-जगह बैठे पशुओं को हटाने पर वह हमला भी कर देते हैं। इसके अलावा आपस में लड़कर राहगीरों एवं बाइक सवारों को घायल करते हैं। रात में पशुओं के सड़क पर बैठ जाने की वजह से कई लोग दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं।
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