लखीमपुर खीरी। आसमान पर बादल छाए रहने के कारण जिले में अधिकतर स्थानों पर लोगों को सूर्यग्रहण नहीं दिखा। ऐसे में अद्भुत खगोलीय घटना देखने से लोग वंचित रह गए।
वर्ष के पहले सूर्य ग्रहण और दुर्लभ खगोलीय घटना को गोला के कृषक समाज इंटर कॉलेज प्रांगण समेत विभिन्न स्थानों पर सोलर चश्मे, पिनहोल कैमरा से देखने का प्रयास किया गया लेकिन बादलों के कारण निराशा ही हाथ लगी।
कृषक समाज इंटर कॉलेज जीव विज्ञान प्रवक्ता एवं विपनेट इनोवेशन क्लब के समन्वयक डॉ अनिल कुमार ने बताया कि साल का पहला सूर्य ग्रहण यहां प्रात: 10:15 मिनट पर शुरू होकर दोपहर 1:59 तक चला।
भौतिक विज्ञान प्रवक्ता शिवेंद्र वर्मा ने बताया सूर्य ग्रहण तीन तरह का होता है। पूर्ण, वलयाकार और आंशिक सूर्य ग्रहण। इस मौके पर प्रधानाचार्य डॉ लखपतराम वर्मा, इंद्रसेन वर्मा, सुरविंद वर्मा, धर्मराज वर्मा, ओम प्रकाश यादव, अशोक वर्मा, सुनील कुमार मिश्रा आदि मौजूद रहे।
मैलानी समेत कई स्थानों पर सुबह से बादल छाने और बारिश का सिलसिला शुरू हो जाने से यहां लोगों को सूर्यग्रहण नहीं दिखाई दिया। खासकर युवाओं और बच्चों में सूर्यग्रहण देखने की खास जिज्ञासा थी। उनका कहना था कि बारिश और उसके बाद बादलों ने सूर्यग्रहण को देखने से वंचित कर दिया।
इधर, रविवार को चूड़ामणि सूर्य ग्रहण के बाद गोला के पौराणिक शिव मंदिर सहित नगर के प्रमुख मंदिरों के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले गए। भक्तों ने जलाभिषेक, पूजा, दान और जप कर ईश्वर से विश्व को अनिष्ट से बचाने और विश्व मंगल की कामना की।
शनिवार की रात सूतक काल से पूर्व शृंगार पूजा के बाद भगवान भोलेनाथ शयन कराने के बाद पौराणिक शिव मंदिर, मंगला देवी मंदिर, हनुमान मंदिर सहित प्रमुख मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए थे। रविवार को भगवान सूर्य देव को चूड़ामणि ग्रहण से मोक्ष मिलने के बाद सेवादारों ने मूर्तियों मंदिर की दीवारों फर्श की धुलाई, साफ सफाई शुरू की। उसके बाद विश्व मंगल की कामना करते हुए प्रथम पूजन आरती के साथ मंदिरों के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए। मंदिरों में शासन प्रशासन की गाइड लाइन का भी असर दिखा। मंदिरों में लगे घंटों को स्पर्श से बचाने के लिए कपड़े से बांध दिया गया वही पौराणिक शिव मंदिर के गर्भ गृह में एक बार में पांच श्रद्धालुओं को ही पूजन के लिए प्रवेश दिया गया।
लखीमपुर खीरी, पलिया, संपूर्णानगर में भी सूर्य ग्रहण को लेकर मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए और प्रतिमाओं पर पर्दा डाल दिया गया। घरों में लोगों ने नौ बजे से पहले ही अन्न जल ग्रहण किया। शहर के संकटा देवी मंदिर, बाबा जंगलीनाथ शिव मंदिर सहित अन्य मंदिरों में सूर्यग्रहण के दौरान कपाट बंद रहे। अपराह्न तीन बजे के बाद मंदिरों के पट खुले और पूजन अर्चन हुआ।
भोलेनाथ विश्व को अनिष्ट से बचाएंगे
गोलागोकर्णनाथ मंदिर कमेटी अध्यक्ष जनार्दन गिरि ने बताया कि पौराणिक शिव मंदिर को शनिवार की रात सूतक काल से पहले बंद कर दिया गया था। रविवार को सूर्य ग्रहण समाप्त होने पर दोपहर बाद 3:15 बजे भक्तों के दर्शनार्थ खोला गया है। भगवान भोलेनाथ से कामना है कि वह देश और विश्व को अनिष्ट से बचाएं और सब पर कृपा बनाए रखें।