पलियाकलां। दुधवा टाइगर रिजर्व का पर्यटन सत्र एक बार फिर आज बुधवार से शुरू हो जाएगा, लेकिन इसकी जीवनरेखा कही जाने वाली सुहेली नदी को अभी अपने अंदर जमा गाद को निकाले जाने का इंतजार है। क्षेत्रीय विधायक समेत किसानों ने कई बार सुहेली नदी की गाद निकलवाए जाने की मांग की, लेकिन आश्वासन सिर्फ जुबान तक ही सीमित रह गए।
दुधवा जहां उत्तर प्रदेश सरकार के लिए एक अहम भूमिका निभाता है, वहीं सुहेली नदी दुधवा के लिए जीवनरेखा की भूमिका निभाती थी। यह एक तरफ तो दुधवा के वन्यजीवों को पानी मुहैया कराती थी तो वहीं दूसरी तरफ यह दुधवा और कृषक क्षेत्र के बीच एक सीमा का काम करती थी। नदी में पानी भरा होने से वन्यजीवों के आबादी की तरफ आने का खतरा कम रहता था।
हालांकि अब ऐसा नहीं है, नदी में अत्यधिक गाद जमा होने से यह मैदान बन चुकी है। वन्यजीव इसमें विचरण कर लगातार आबादी की ओर आ-जा रहे हैं। इससे मानव व वन्यजीव संघर्ष को बढ़ावा मिला है। वहीं बरसात के समय सुहेली की यही गाद बाढ़ का कारण बनकर हजारों एकड़ खेती को बर्बाद किए हुए है।
मुद्दा बहुत अहम है, हर बार खासतौर से क्षेत्रीय विधायक रोमी साहनी द्वारा इसको लेकर कई बार वनमंत्री डाॅ. अरुण कुमार सक्सेना से भी कहा गया है। पिछले पर्यटन सत्र में भी विधायक ने सुहेली की गाद सफाई कराने की मांग उठाई थी, लेकिन केवल आश्वासन ही मिलता हर बार दिख रहा है।
सफाई के लिए वन विभाग ने कार्यदायी विभाग को नहीं दी एनओसी
सालों पहले नदी की गाद सफाई का काम इस वजह से रुक गया था कि वन विभाग ने कार्यदायी विभाग को एनओसी प्रदान नहीं की थी। तत्कालीन डीडी महावीर कौजलगि ने किसानों के साथ जाकर पूरी नदी का भ्रमण किया और केंद्रीय वन विभाग से एनओसी दिलाने के लिए पत्राचार किया, लेकिन वह फाइलें कहां दफन हो गईं, इसका पता नहीं।
सुहेली पुल से पहले गड्ढा बन सकता है दुर्घटना का कारण
पलियाकलां। दुधवा नेशनल पार्क जाने पर करीब एक किलोमीटर पहले पड़ने वाले सुहेली नदी पुल से कुछ पहले सड़क किनारे एक बड़ा गड्ढा हो गया है। इससे दुर्घटना होने की संभावनाएं बनी रहती है। हालांकि इस गड्ढे के चारों ओर ईंट-पत्थर लगा दिए गए हैं, लेकिन अंधेरे में इस गड्ढे में पड़कर वाहन चालक चोटिल हो सकते हैं। पास ही खाई होने के कारण कोई बड़ी घटना भी घटित हो सकती है। पार्क के पर्यटन सत्र का आज से आगाज हो रहा है, लेकिन इस गड्ढे की तरफ किसी का ध्यान नहीं है। संवाद