चीनी मिलों ने तय समय पर पेराई शुरू कर दी, लेकिन प्रदेश सरकार ने इस बार काफी देर से राज्य परामर्शी मूल्य (एसएपी) घोषित किया। इस बीच चीनी मिलों ने भी मौके का फायदा उठाते हुए गन्ना एक्ट के मुताबिक किसानों को भुगतान नहीं किया। लिहाजा पिछले वर्षों की अपेक्षा इस बार चीनी मिलों में बकाए का ग्राफ काफी ज्यादा बढ़ गया है। बजाज ग्रुप की तीन और सहकारी क्षेत्र की दो मिलें किसानों को भुगतान करने में फिसड्डी बनी हुई हैं। बताते चलें कि एसएपी की घोषणा करने के साथ ही सरकार ने चीनी मिलों को राहत देते हुए किसानों को प्रथम किस्त के तौर पर 230 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान करना है। जबकि अवशेष दूसरी किस्त का बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान चीनी मिल बंद होने की तिथि से तीन माह के अंदर करने के आदेश दिए गए हैैं। बजाज ग्रुप की गोला मिल पर सबसे अधिक एक अरब 52 करोड़ 20 लाख 12 हजार रुपये बकाया है। इसी तरह पलिया मिल पर एक अरब 32 करोड़ 40 लाख 80 हजार रुपये और खंभारखेड़ा मिल पर एक अरब 16 करोड़ 46 लाख 86 हजार रुपये बकाया है। जबकि ऐरा मिल पर 60 करोड़ तीन लाख 95 हजार, अजबापुर पर 32 करोड़ 44 लाख 76 हजार रुपये, कुंभी पर 12 करोड़ 21 लाख दो हजार, गुलरिया पर 10 करोड़ 59 लाख 35 हजार रुपये, बेलरायां पर 29 करोड़ 60 लाख 37 हजार रुपये, संपूर्णानगर पर 27 करोड़ 55 लाख 35 हजार रुपये बकाया है।
एक्ट के मुताबिक भुगतान में तीन मिलें अव्वल
गन्ना एक्ट के मुताबिक गन्ना खरीद की तिथि से 14 दिन के अंदर भुगतान करने के मामले में सिर्फ तीन चीनी मिलें अजबापुर, कुंभी और गुलरिया मिल अव्वल स्थान पर बनी हैं। अजबापुर ने 21 जनवरी तक, कुंभी और गुलरिया मिल ने 25 जनवरी 2016 तक भुुगतान कर दिया है।
सात मिलों पर ब्याज की देनदारी
किसानों को भुगतान में देरी करने के चलते सात मिलों पर करोड़ों के ब्याज की देनदारी बन गई है। इसमें गोला पर एक करोड़ 49 लाख 60 हजार, पलिया पर 96 लाख 19 हजार, खंभारखेड़ा पर एक करोड़ 92 लाख, ऐरा पर 35 लाख 33 हजार, अजबापुर पर 33 लाख 18 हजार रुपये, बेलरायां पर 18 लाख 90 हजार रुपये और संपूर्णानगर पर एक लाख दो हजार रुपये ब्याज देय हो गया है। जिला गन्ना अधिकारी जगदीश चंद्र यादव ने बताया, चीनी मिलों पर भुगतान के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है, जिसमें कई मिलें प्रतिदिन भुगतान कर रहीं हैैं। बजाज ग्रुप की मिलों पर तेज गति से भुगतान के लिए जोर दिया जा रहा हैै।