निघासन। सुहेली नदी के प्राकृतिक बहाव को रोककर कुछ लोगों ने कई एकड़ भूमि पर गन्ने की खेती शुरू कर दी है। इससे न सिर्फ नदी का जलस्तर बढ़ रहा है, बल्कि आसपास के गांवों के लिए बाढ़ का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि सिन्हौना, रमुआपुर, बसंतापुर समेत दर्जन भर गांवों में हर साल बाढ़ के कारण काफी नुकसान होता है। नदी के प्रवाह को रोकने से न सिर्फ रिहायशी इलाकों में पानी भरेगा बल्कि फसलें भी बर्बाद हो जाएंगी।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध कब्जे को तत्काल हटाया जाए और नदी को उसके प्राकृतिक बहाव में बहने दिया जाए। उनका कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाया गया तो बरसात में हालात बेहद गंभीर हो सकते हैं।
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अधिवक्ता ने उठाई सीमांकन की मांग
अधिवक्ता सर्वेश गुप्ता ने मांग की है कि नदियों की जमीन का सीमांकन कर उन्हें रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए। साथ ही कब्जेदारों से मुआवजा वसूलकर उन पर कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई भी सरकारी जमीन पर कब्जा न कर सके।
मामला संज्ञान में आया है, जल्द ही नदी की जमीन का सीमांकन कराकर कब्जेदारों को नोटिस जारी कर जमीन को कब्जामुक्त कराया जाएगा। जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा।
- राजीव निगम, एसडीएम