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ऐसे तो हो चुकी जनसंख्या नियंत्रित

Sat, 21 Nov 2015 09:47 PM IST
लखीमपुर खीरी
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तेजी से बढ़ रही जनसंख्या भले ही देश की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक हो, लेकिन जिले में जनसंख्या नियंत्रण के नाम पर औपचारिकता ही हो रही है। वर्ष बीतने को है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग अब तक नसबंदी में 10,676 के लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 386 आपरेशन ही कर पाया है। इसके अलावा अन्य मामलों में भी वह लक्ष्य से काफी पीछे है। यदि जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रम इसी गति से चला तो लक्ष्य के आधे तक पहुंचने में भी दिक्कत होगी।
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जिले में वर्ष 2015- 6 के लिए पुरुष नसंबदी के लिए 300 का और महिला नसबंदी के लिए 10,376 का लक्ष्य रखा गया था। इसके अलावा कापर टी में 24,972  और ओरल पिल्स की 18,685 गोलियों के वितरण का लक्ष्य रखा गया था लेकिन इस बार स्वास्थ्य विभाग इसके लिए शिविर ही नहीं आयोजित कर सका। एक कारण यह भी है कि अब डॉक्टर नियम से अधिक नसबंदी आपरेशन करने में भी कतराते हैं।
इसका नतीजा यह है कि जनसंख्या नियंत्रण में जिले की स्थिति बदतर है। लक्ष्य के हिसाब से हर महीने लगभग 864 महिला और 25 पुरुष नसबंदी आपरेशन होने चाहिए। जबकि हालत यह है कि पिछले महीने 83 महिला आपरेशन हुए। जबकि अप्रैल से अब तक केवल 383 महिलाओं के ही आपरेशन हो सके। पुरुषों के मामले में स्थिति और भी अधिक खराब है अब तक 300 के लक्ष्य के सापेक्ष केवल तीन पुरुषों के ही नसबंदी आपरेशन हुए हैं। इस हिसाब से स्वास्थ्य विभाग पुरुष नसंबदी के मामले में एक प्रतिशत और महिला नसबंदी के मामले में मात्र 3.69 प्रतिशत कार्य कर पाया है। यही स्थिति अन्य मामलों में भी है।
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कापर टी के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने 24,972 लक्ष्य के सापेक्ष 4955 केस किए हैं जो लक्ष्य का 19.84 प्रतिशत है। ओरल पिल्स गोलियों के वितरण के 18685 लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 818 महिलाओं को इन्हें वितरित किया जा सका है जो लक्ष्य का 4.38 प्रतिशत है। लक्ष्य पूरा करने के लिए अभी स्वास्थ्य विभाग के पास चार महीने का समय है। लक्ष्य पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग को कार्य की गति और तेज करनी पड़ेगी यदि इसी गति से कार्य हुआ तो लक्ष्य के आधे तक पहुुंचने में भी दिक्कत हो जाएगी।
ये हैं मुख्य दिक्कतें
जनसंख्या नियंत्रित पूरा न हो पाने के पीछे मुख्य कारण ये है कि जिला अस्पताल के तीन सर्जनों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों की सीएचसी और पीएचसी में स्वास्थ्य विभाग के पास एक भी सर्जन नहीं है। सीएचसी और पीएचसी में शिविर लगाने के लिए सीएमओ को जिला अस्पताल से ही सर्जन लेने पड़ते हैं। जिला अस्पताल के एक सर्जन को नियमित आपरेशन और दूसरे को ओपीडी देखनी पड़ती है।
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