- ब्लाक बांकेगंज की दो पंचायतों में पहुंचे एसडीएम
- विभागीय कार्यों के चलते नहीं पहुंचे डीएम और सीडीओ
- अफरातफरी में एडीओ पंचायत और सचिव ने बुलाई बैठक
सशक्त गांव और विकसित प्रदेश का खाका खींचने के लिए चलाई जा रही मुहिम के दूसरे चरण में अफसर चौकन्ने रहे। खुली बैठकों के लिए जारी रोस्टर के मुताबिक ब्लाक बांकेगंज की 15 ग्राम पंचायतों में बृहस्पतिवार को ग्राम सभा की बैठकें कराई गईं। डीएम, सीडीओ और एसडीएम गोला को ग्राम सभा की बैठकों में पहुंचना था, लेकिन डीएम और सीडीओ विभागीय व्यस्तता के चलते नहीं पहुंचे। एसडीएम गोला घनश्याम त्रिपाठी रोस्टर के मुताबिक पंचायतों की खुली बैठक में शामिल होकर ग्रामीणों को महत्वपूर्ण जानकारियां दी।
बता दें सशक्त गांव मुहिम के पहले चरण में ब्लाक बांकेगंज की 15 ग्राम पंचायतों में खुली बैठके महज रस्म अदायगी साबित हुई थीं। पहले चरण में देरी से सूचना मिलने पर आननफानन में बुलाई गई खुली बैठकों में कहीं अफसर नदारद रहे थे, तो कहीं सचिव गायब थे। कोरम और सूचना के अभाव में कई पंचायतों में तो इन बैठकों का आयोजन तक नहीं हो पाया था, जिसकी खबर अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी। दूसरे राउंड में गुरुवार को बांकेगंज ब्लाक क्षेत्र में 15 ग्राम पंचायतों की खुली बैठकों में अफसर और सचिव चौकन्ने रहे। इसमें एसडीएम गोला घनश्याम त्रिपाठी ने अपने कोटे की पांच में दो पंचायतों सौखिया और संसारपुर में बैठक में शामिल होकर लोगों को केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं समाजवादी पेंशन, लैपटाप, कन्या विद्याधन, कृषक दुर्घटना बीमा, जननी सुरक्षा, विधवा पेंशन, समाजवादी स्वर्ण यात्रा, उज्जवला योजना आदि की जानकारी दी। एसडीएम ने बताया कि ग्राम पंचायत भरिगवां में खुली बैठक न होने पर वहां से वापस लौटना पड़ा। शेष अन्य पंचायतों में एडीओ पंचायत गोवर्धन प्रसाद राणा और सचिव ब्रजेश सविता ने खुली बैठकों का आयोजन कर लोगों को जानकारियां दी।
पूर्णकालिक बीडीओ की तैनाती न होने से खुली बैठकों को लग रहा पलीता
बांकेगंज ब्लाक में पूर्णकालिक बीडीओ की तैनाती न होने से पंचायतों में खुली बैठकों का आयोजन फ्लाप शो साबित हो रहा है। इसके अलावा पंचायत सचिवों की कमी के चलते जानकारी के अभाव में लोगों के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाएं परवान नहीं चढ़ पा रही है। ग्रामीणों का आरोप है एक सचिव के पास दर्जन भर पंचायतों का चार्ज है। ब्लाक के कई चक्कर काटने के बाद भी उन्हें संबंधित योजनाओं की जानकारी नहीं मिल पाती है।