फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

500 सालों में पहली बार सूखी कफारा की बावड़ी

Thu, 05 May 2016 11:20 PM IST
प्रेम जायसवाल/धौरहरा।
विज्ञापन
बाउड़ी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
कभी गर्मियों में भी तर रहने वाली तराई में सूखने लगे जलाशय
विज्ञापन

कभी गर्मियों में भी तर रहने वाली तराई में इस बार हालात ठीक नहीं है। बड़े वन क्षेत्र वाले लखीमपुर खीरी में जल संग्रहण क्षेत्र भी काफी है। यहां 2223 वेटलैंड हैं। पिछली बरसात और बीती सर्दी में मामूली बारिश का असर है कि यहां भी जलाशय सूखने लगे हैं। अप्रैल में ही मई-जून जैसी गर्मी की वजह से धौरहरा क्षेत्र के कफारा कस्बे का बावड़ी तीर्थ इस बार पूरी तरह सूख गया है। ये बावड़ी 500 साल पुरानी है और इसका पानी सूखा पड़ने की स्थिति में भी नहीं सूखता था। बावड़ी तीर्थ के सूखने पर स्थानीय लोग किसी अनिष्ट की आशंका से हलाकान हैं।
जिला मुख्यालय से करीब 62 किलोमीटर दूर कफारा कस्बे में प्राचीन लीलानाथ मंदिर के पास 16वीं शताब्दी का बना बावड़ी तीर्थ न केवल धार्मिक बल्कि ऐतिहासिक महत्व का भी है। 225 फुट लंबे और 225 फुट चौड़े इस वर्गाकार बावड़ी तीर्थ का जीर्णोद्धार करीब 100 साल पहले सिंगाही स्टेट की महारानी सुरथ कुमारी शाह ने कराया था। बावड़ी के बीच में तथा चारों कोनों पर चार कुएं बने हुए हैं। इन स्रोतों से निकलने वाले पानी से यह बावड़ी तीर्थ हमेशा भरा रहता था।
विज्ञापन

दस फुट गहरे इस बावड़ी तीर्थ के चारों ओर पक्की सीढ़ियां बनी हैं। इस तीर्थ के किनारे जिले की सांस्कृतिक विरासत के रूप में पहचान रखने वाला सात दिवसीय सतुवाही मेला बैसाख माह की अमावस्या से लगता है। श्रद्धालु इस तीर्थ के जल से लीलानाथ मंदिर में स्थापित प्राचीन शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं।
 कस्बे के वयोवृद्ध बृजेशनंदन अवस्थी, शिवदयाल, जगदंबा प्रसाद शुक्ल, विनोद तिवारी और विक्रम प्रसाद का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में कभी इस विशाल सरोवर को सूखा नहीं देखा। इस बार जो हुआ वह आश्चर्यजनक है।
उधर पर्यावरणविदों का कहना है कि पिछले साल और सर्दियों के मौसम में बरसात न होने के साथ इस साल समय से पहले कड़ी धूप और भीषण गर्मी के कारण पानी का जलस्तर काफी नीचे चला गया है। इससे कुओं के सोतों से पानी आना बंद हो गया है। इसी के चलते इस साल पहली बार यह बावड़ी सूख गई है। एक सप्ताह बाद होने वाले सतुवाही मेले के दौरान श्रद्धालुओं को हैंडपंप के पानी से भगवान शिव का जलाभिषेक करना होगा।
विज्ञापन


इस साल अप्रैल माह से भूजल स्तर में काफी गिरावट दर्ज की गई है। भूगर्भ जल के अंधाधुंध दोहन और जल संरक्षण के प्रयास न होने से स्थिति भयावह हो सकती है।
-सीएल जायसवाल, सहायक अभियंता, लघु सिंचाई

ग्लोबल वार्मिंग, भूगर्भ जल के दोहन से तराई के इस जिले में भी पानी का संकट शुरू हो गया है। भूगर्भ जलस्तर के लगातार नीचे खिसकने से यह संकट और ज्यादा गहरा सकता है।
-डॉ. अनिल सिंह, पर्यावरणविद, समन्वयक जिला विज्ञान क्लब लखीमपुर खीरी। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें