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Lakhimpur Kheri News: उधार के कर्मचारियों से चल रहा राजकीय पुस्तकालय

Fri, 26 Sep 2025 12:48 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी

सार

लखीमपुर खीरी के राजकीय पुस्तकालय में 2016 से स्थायी लाइब्रेरियन की नियुक्ति नहीं हो सकी है। फिलहाल अन्य कर्मचारियों को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इससे पुस्तकालय संचालन में अस्थिरता बनी हुई है।
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अम्माज थरवरनगंज - फोटो : सर्किट हाउस में मंदिर निर्माण कार्य की जानकारी देते नृपेंद्र मिश्र
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विस्तार
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लखीमपुर खीरी। विकास भवन के समीप संचालित राजकीय पुस्तकालय में वैसे तो विद्यार्थियों के बैठकर पढ़ने और वाईफाई जैसी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं, लेकिन साल 2016 के बाद से पुस्तकालय को कोई भी स्थायी लाइब्रेरियन नहीं मिल सका।
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पुस्तकालय के संचालन का जिम्मा तब से किसी न किसी कर्मचारी के हवाले किया जाता रहा। इसके बाद से दूरदराज के शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जा रही है। 20 साल से भी ज्यादा समय पहले राजकीय पुस्तकालय की स्थापना की गई थी। इसमें गिनती के लाइब्रेरियन तैनात रहे। साल 2016 में संजय कुमार शाह प्रभारी थे। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद से यहां पर कोई भी लाइब्रेरियन के पद पर नहीं आया। इस कारण कुछ समय तक पुस्तकालय बंद भी रहा, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने छात्र-छात्राओं की समस्याओं को देखते हुए कुछ कर्मचारी बेसिक तो कुछ कालेजों के कर्मचारियों की ड़्यूटी लगाई। फिलहाल, लाइब्रेरी का अतिरिक्त प्रभार देख रहे कर्मचारी स्थायी लाइब्रेरियन की तैनाती की राह देख रहे हैं।
30 हजार से ज्यादा किताबों का संग्रह
मौैजूदा समय में पुस्तकालय के पास विभिन्न पाठ्यक्रमों से संबंधित करीब 30 हजार किताबों का संग्रह है। पुस्तकालय प्रभारी अशोक मिश्रा ने बताया कि यहां पर आने वाले छात्र-छात्राओं से न्यूनतम शुल्क लेकर किताबें घर के लिए भी दी जाती हैं। एक महीने से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी अगर कोई किताब जमा नहीं करता है तो जुर्माना भी लिया जाता है।
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आजीवन सदस्यता के लिए 11 सौ रुपये है फीस

-पुस्तकालय प्रभारी अशोक मिश्रा का कहना है कि अमूमन रोज आने वाले छात्र-छात्राओं से किसी भी तरह का कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। वहीं, आजीवन सदस्य बनने के लिए 11 सौ रुपये फीस ली जाती है। यही बच्चे लाइब्रेरी की किताबें अपने साथ घर ले जा सकते हैं। बाकी अन्य छात्रों के लिए पढ़ाई की सुविधा पुस्तकालय में ही है।


कुछ महीनों पहले ही लाइब्रेरी आईं। यहां का माहौल काफी अच्छा है। किताबें भी पर्याप्त हैं। किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं है।
प्रगति वर्मा

प्राइवेट लाइब्रेरी में महंगी फीस है। यहां पर कम रुपयों में शांत और अच्छा माहौल मिलता है।
अम्माज

लाइब्रेरियन की तैनाती के लिए शासन से पत्राचार किया गया है। अभी तक कोई लाइब्रेरियन नहीं मिला है। हालांकि, पुस्तकालय में प्रभारी काम देख रहे हैं।
-विनोद मिश्रा, डीआईओएस

अम्माज थरवरनगंज- फोटो : सर्किट हाउस में मंदिर निर्माण कार्य की जानकारी देते नृपेंद्र मिश्र

अम्माज थरवरनगंज- फोटो : सर्किट हाउस में मंदिर निर्माण कार्य की जानकारी देते नृपेंद्र मिश्र

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