छह महीने से खाद के लिए तरस रहे किसान
निघासन में भारत-नेपाल सीमा पर बसे बेलापरसुआ आदि गांवों के किसान खाद के लिए पिछले छह महीनों से परेशान हैं। बहुउद्देशीय साधन सहकारी समिति पर यूरिया नदारद है। स्थिति यह है कि किसान निजी दुकानों से खाद खरीदने की कोशिश करते हैं, लेकिन सीमा क्षेत्र होने के कारण सुरक्षा जांच में उन्हें खासी परेशानी उठानी पड़ती है।
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जनवरी, 2025 में बेलापरसुआ समिति के लिए खाद लेकर जा रहे ट्रक को एसएसबी ने सीमा पर रोक कर सीज कर दिया था। जांच में समिति के लाइसेंस और जीएसटी दस्तावेजों में खामियां पाई गई थीं, जिनका समाधान अब तक नहीं किया गया है। नतीजतन, समिति पर खाद की आपूर्ति पूरी तरह ठप है।
सहकारी विभाग के निबंधक रजनीश प्रताप सिंह ने बताया कि कृभको की 1029 मीट्रिक टन यूरिया की रैक प्राप्त हो चुकी है, लेकिन बेलापरसुआ को फिलहाल इससे बाहर रखा गया है। समिति के लाइसेंस और जीएसटी से जुड़ी दिक्कतों को जल्द सुलझाया जाएगा।
बिजुआ में लग रही किसानों की लंबी कतार
बिजुआ क्षेत्र के कस्बा पड़रिया तुला में शुक्रवार को यूरिया वितरण केंद्रों पर सुबह से ही किसानों की लंबी कतारें देखी गईं। बी पैक्स साधन सहकारी समिति और प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र पर किसानों का जमावड़ा लगा रहा।
बीते एक सप्ताह से खाद न मिलने के कारण किसानों में बेचैनी थी। बृहस्पतिवार को यूरिया खाद की नई खेप केंद्र पर पहुंचने की सूचना मिलते ही शुक्रवार तड़के से ही किसान पहुंचने लगे। आसपास के गांवों से भी किसान वितरण केंद्रों पर जुटे।
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पड़रिया तुला पुलिस चौकी की टीम को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र में मशीन में आई दिक्कत के कारण कई किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। किसान प्रेम गुप्ता, कुलवंत सिंह, महेश, छोटे लाल समेत दर्जनों किसानों को निराश होकर खाली हाथ लौटना पड़ा।