शहर में बड़े नालों की सफाई को लेकर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। खासकर उन नालों को साफ करने की कोई तैयारी नहीं दिखाई दे रही, जिनकी वजह से शहर में जगह-जगह जलभराव की स्थिति उत्पन्न होती है। बिना किसी टेंडर के मनमाने ढंग से शुरू किए गए सफाई अभियान में नालों का मलबा सड़क पर डाल दिया जा रहा है। इस तरह जगह-जगह मलबे का ढेर भी लग गया है।
मनमानी का आलम यह है कि बिना किसी अनुमति या टेंडर के शुरू किए गए नाला सफाई अभियान को एक पखवाड़े से ज्यादा का समय गुजर गया है, इस दौरान मेला-मैदान रोड, संकटा देवी, डीसी रोड, रेलवे स्टेशन रोड समेत तमाम जगहों पर छोटे नालों की सर्फाई का काम भी लगभग हो गया है लेकिन अब तक शहर के बड़े नालों की ओर किसी का ध्यान नहीं है। नगर पालिका में नाला सफाई का कार्य देख रहे एकाउंटेंट प्रहलाद का कहना है कि शहर में 52 नाले हैं, वैसे तो सभी नालों की सफाई होनी है लेकिन जिन नालों की सफाई में एक लाख रुपये तक खर्च हो रहा है, उन नालों की सफाई पर जोर दिया जा रहा है। एकाउंटेंट ने बड़े नालों की सफाई के बाबत कोई तस्वीर साफ नहीं की। उनके मुताबिक नालों की सफाई के लिए शासन से कोई बजट नहीं मिलता, जो भी कार्य होना है वह सफाई कार्य के बजट से ही होता है। एकाउंटेंट ने नाला सफाई के लिए टेंडर होने या बजट स्वीकृत होने के बाबत भी कोई जानकारी नहीं दी।
गांधी विद्यालय चौराहा पर दिनभर परेशान हुए राहगीर
शहर के गांधी विद्यालय चौराहा पर सोमवार को मनमाने ढंग से नाले की सफाई कर मलबा सड़क के बीचोबीच डाल दिया गया। इससे एक तरफ का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। इस चौराहे से जेल रोड, अस्पताल रोड, रोडवेज, खीरी टाउन या राजापुर मंडी और उससे सटे मोहल्लों के लोग गुजरते हैं, लेकिन सोमवार को मलबे के कारण चौराहे पर कई बार जाम लगा। इस बाबत नाला सफाई का कार्य देख रहे एकाउंटेंट प्रहलाद का कहना है कि नाला साफ कर मलबा तो सड़क पर ही डाला जाएगा।