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...तो इस बार बढ़ जाएगी मिट्टी के दीयों की बिक्री

Tue, 25 Oct 2016 11:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
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सांकेतिक चित्र - फोटो : Getty images
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लोगों में ईको फ्रैंडली दीवाली की धुन, कम होगा प्रदूषण
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चीन की सामग्री के बहिष्कार की हवा के चलते इस बार मिट्टी के दीयों की बिक्री में खासे इजाफे की उम्मीद है। स्वदेशी अपनाने की अपीलें रंग ला रहीं हैं। इसके साथ ही लोग इस बार की दीवाली पूरी तरह ईको फ्रैंडली मनाने की ठान बैठे हैं। यही कारण है कि इस बार आतिशबाजी के सामान की बिक्री भी कम है। लोग चायनीज झालरों की जगह अधिक संख्या में दीये खरीद रहे हैं। इससे लगता है कि इस बार दिवाली पर परंपरागत रंग चढ़ रहा है। 
चायनीज सामग्री के बहिष्कार की अपीलें न केवल रैलियां निकालकर की जा रही हैं, बल्कि सोशल मीडिया पूरी तरह इन्हीं अपीलों से भरी है। इसका असर भी साफ दिख रहा है। मिट्टी के दीये बनाने वाले कारीगरों का कहना है कि इस बार उन्हें मिट्टी के दीयों के एडवांस में आर्डर मिल रहे हैं। लोग चाइनीज झालरों की जगह मिट्टी के दीयों को तरजीह दे रहे हैं। इलेक्ट्रिकल्स की दुकानों पर बिजली की रंग बिरंगी झालरों की बिक्री हो तो रही है, लेकिन चायनीज के बजाय देशी झालरों की। 
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रिटायर्ड कर्मचारी अवधेश कुमार का कहना है कि इस बार युवाओं ने ईकोफ्रेंडली दीवाली मनाने की ठान ली है। हालांकि इसमें खर्च कुछ ज्यादा आएगा, लेकिन दीयों की रोशनी में हानिकारक कीट पतंगे नष्ट होंगे और पर्यावरण शुद्ध होगा। प्राचीन काल से दीपावली पर दीयों को जलाने के पीछे भी संभवत: यही वैज्ञानिक आधार रहा होगा। युवा आलोक मिश्र का कहना है कि चायनीज वस्तुओं का बहिष्कार तो पहले से होना चाहिए था। चायनीज चीजें यूज एंड थ्रो लायक होती हैं। इनसे देश में प्लास्टिक कचरा जमा हो रहा है। इस बार चायनीज झालरों की जगह दीयों की रोशनी से दीवाली जगमगाएंगे। 
गृहणी अनुराधा कहती हैं कि चायनीज झालरों की रोशनी मंद होती है। जबकि देशी झालरें महंगी भले ही हों, लेकिन उनकी रोशनी अपेक्षाकृत तेज होती है। यह झालरें कई साल तक चलती हैं, जिससे प्लास्टिक कचरा भी कम होता है। झालरों की अपेक्षा दीये पर्यावरण के लिए सबसे अच्छे रहते हैं। दीयों की रोशनी पर आकर बरसात में होने वाले हानिकारक कीड़े मकोड़े नष्ट हो जाते हैं। 
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मिट्टी के बरतन और दीये बनाने वाले कारीगर रामू का कहना है कि इस बार वह एक से बढ़कर एक स्टाइलिश दीयों का निर्माण कर रहे हैं। कई दीयों को एक में जोड़ कर रोशनी का गुलदस्ता बनाया है। तेल से जलने वाले दीयों के साथ मोम से जलने वाले दीये भी बनाए हैं। लंबे अरसे बाद यह पहला मौका है जब लोग मिट्टी के दीयों के लिए पहले से आर्डर दे रहे हैं। शॉपिंग मॉल में भी स्टाइलिश दीयों की डिमांड है।
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