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तो क्या अपहरण गैंग फिर लौट आया...

Tue, 19 Jan 2016 10:34 PM IST
लखीमपुर खीरी
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चोरी और लूट की योजना बनाते समय ही बदमाशों को गिरफ्तार कर लेने का दावा करने वाली पुलिस अपहरण हो जाने के बाद भी बदमाशों को गिरफ्तार नहीं कर पाई। बदमाश 48 घंटे तक गांव के आसपास ही अपना ठिकाना बनाकर पुलिस को चुनौती देते रहे और खाकी उन तक पहुंच ही पाई नहीं। पांच हजार की आबादी के बीच से तीन लड़कियों को अगवा कर ले जाना, 48 घंटे में कई बार फोन कर 50 लाख की फिरौती को पांच लाख में तय कर उसे ले उड़ना, यह कहानी भले ही फिल्मी लगे लेकिन छह बदमाशों ने इसे हकीकत में अंजाम दे डाला। घटना न केवल बदमाशों की तेजी दिखा रही है बल्कि नेपाल बार्डर पर फिर से शुरू हो रहे अपहरण उद्योग को भी दर्शा रहा है। बदमाश आश्वस्त दिख रहे थे कि वह घटना को अंजाम देकर फिरौती वसूल ले लेंगे। साथ ही आशंका दे गया है कि क्या अपहरण उद्योग को फिर से खाकी और खादी का संरक्षण मिलने लगा है।
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कड़ाके की ठंड में रात साढ़े नौ बजे से हथियारों से लैस होकर छह बदमाश कोल्हू मालिक रामबली गुप्ता के घर धावा बोलकर तीन बहनों, उनकी मां और नौकरानी को अगवा कर लिया था। हालांकि कुछ दूर जाने के बदमाशों ने मां और नौकरानी को छोड़ दिया था। डीआईजी, एसपी की अगुवाई में 12 थानों की पुलिस, पीएसी, एसएसबी, एसटीएफ की टीमें लगातार इलाके में कांबिंग करती रहीं लेकिन बदमाशों का पता नहीं लगा पाईं। चौंकाने वाली बात यह है कि बदमाश गांव से दस से बीस किमी की दूरी के बीच ही अपना ठिकाना बनाते रहे और फोन पर लगातार बात करते रहे। लड़कियों को जहां रखा गया था वहां पर ट्रेनों की आवाज आ रही थी। यानी लड़कियों को बेलरायां स्टेशन के आसपास ही जंगल में रखा गया। कांबिंग को धता बताते हुए बदमाशों ने पांच लाख रुपये की फिरौती भी हासिल कर ली।
घटना को जैसे अंजाम दिया गया उससे बदमाश अपने मकसद में कामयाब होने को पूरी तरह से आश्वस्त थे। सर्विलांस के बूते और पुल पुलियों पर चोरी की योजना बनाते बदमाशों को धर दबोचने का दावा करने वाली पुलिस लगातार फोन पर हो रही बात के बाद भी बदमाशों को नहीं पकड़ पाई। यह भी चौंकाता है। यही नहीं, लड़कियों की बरामदगी के बाद पूरा दिन बीत गया लेकिन पुलिस यह नहीं पता कर पाई किस गैंग ने इस घटना को अंजाम दिया। ऐसे में लोगों में यह भी चर्चा है कि बदमाशों को सफेदपोश नेताओं या पुलिस का संरक्षण मिल रहा है। फिलहाल मामले में किसी सफेदपोश नेता या किसी पुलिस अधिकारी की मिलीभगत जांच के विषय हो सकते हैं। उधर निघासन सर्किल की पुलिस की सुस्ती और मिलीभगत के सवाल पर एसपी अखिलेश चौरसिया सिर्फ इतना कहते हैं कि सभी पहलुओं पर जांच हो रही है। किसी की भी संलिप्तता हुई तो वह चाहे जितने बड़े पद पर बैठा हो, कार्रवाई की जाएगी।
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पहले भी सफेदपोशों का बदमाशों से रहा है नाता
धौरहरा और निघासन के तराई इलाके में डेढ़ दशक पहले ललित मोहन उर्फ मुंडे का आतंक रहा, जिसे इलाके के सफेदपोशों का संरक्षण प्राप्त था। इस मामले की कई बार जांच ही नहीं हुई, बल्कि उसका जब एनकाउंटर हुआ तो उसमें भी कुछ सफेदपोशों का नाम उछला था। इसके बाद 10 अगस्त 2012 को जेल से मेडिकल कालेज ले जाया गया तो डालू लौटते समय सीओ ऑफिस के पीछे से ही फरार हो गया थ। फिर 10 सितंबर 2013 को डालू जेल से पेशी पर गए बग्गा को सिपाही की हत्या कर पुलिस कस्टडी से भगा ले गया था। डालू बीते साल पुलिस और ग्रामीणों से मुठभेड़ में मारा गया था। इसके बाद पुलिस ने कुछ सफेदपोशों के सेलफोन नंबर की सीडीआर भी निकलवाई थी। वजह थी कि डालू और बग्गा को भी सफेदपोशों का संरक्षण हासिल होने की बात कही जा रही है। पुलिस अधिकारियों की मानें तो बग्गा अब भी इस इलाके में सक्रिय रहकर नेपाल में ठिकाना बनाए है।
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