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छह तहसीलों में 20 बाढ़ केंद्र और 39 चौकियां बनाई

Sun, 03 Jul 2016 11:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो  लखीमपुर खीरी।
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- फोटो : amar ujala
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- बाढ़ के हालात से निपटने को प्रशासन तैैयार 
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- पांच तहसीलों में 243 गांवों पर बाढ़ का खतरा
- 3.68 लाख जनसंख्या हो सकती है बाढ़ से प्रभावित
- 387 नावों के साथ 78 गोताखोर रहेंगे मुस्तैद
उत्तराखंड समेत जिले में हुई अच्छी बारिश से पलिया, निघासन, धौरहरा, गोला और लखीमपुर तहसील क्षेत्र में बाढ़ का खतरा बढ़ गया हैै। जिला प्रशासन ने बाढ़ से निपटने और लोगों को राहत मुहैया कराने के लिए तैयारियां पूरी कर ली हैैं। प्रभावित तहसीलों में 20 बाढ़ केंद्र और 39 चौकियां स्थापित करने का दावा है। 243 गांवों पर बाढ़ के संभावित खतरे को देखते हुए जान-माल की सुरक्षा के लिए 387 नाव और 78 गोताखोर की व्यवस्था की गई है।
बाढ़ के दौरान पीड़ितों को राहत पहुंचाने के लिए 20 बाढ़ केंद्र और 39 चौकियां बनाई गई हैं। लखीमपुर में चार-चार, मोहम्मदी में दो-दो, निघासन में चार से 12, धौैरहरा में चार-छह, गोला में एक-तीन, पलिया में पांच-12 बाढ़ केंद्र और चौकियां स्थापित की गई हैं। 243 गांव संभावित बाढ़ प्रभावित की सूची में रखे गए हैं, जिसमें लखीमपुर तहसील के 404, निघासन के 54, धौैरहरा के 55, गोला के 14, पलिया के 81 गांव शामिल हैं। जिला प्रशासन का अनुमान है कि 243 गांवों के बाढ़ की जद में आने से 3.68 लाख जनसंख्या प्रभावित हो सकती है। लिहाजा जान-माल की सुरक्षा के लिए 387 नावों की व्यवस्था की गई है, जिसमें लखीमपुर को 59, मोहम्मदी को दो, निघासन को 100, धौरहरा को 140, गोला को 34, पलिया को 52 नावें आवंटित की गई हैं। जबकि चिह्नित किए गए 78 गोताखोर में से लखीमपुर को 18, मोहम्मदी को तीन, निघासन को 19, धौरहरा को 21, गोला को एक, पलिया को 14 दिए गए हैं। 
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71 गांवों पर हैै कटान का खतरा
बाढ़ के अलावा सबसे बड़ा खतरा कटान का भी है, जिससे हर साल सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि और गांवों का नामोनिशान मिट जाता हैै। जिला प्रशासन ने इस बार भी 71 गांवों को चिह्नित किया गया, जिनमें कटान का खतरा है। लखीमपुर तहसील में 16, निघासन में 18, धौरहरा में 22, गोला में दो, पलिया में 13 गांव चिह्नित किए गए हैं। 

सबक भी कराया याद
वर्ष 2014 में 15 अगस्त 2014 को रात नौ बजे बनबसा बैराज डाउन से लगभग 4,78,500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, जो 24 घंटे में लखीमपुर पहुंच गया था। इससे शारदा बैराज, शारदा नदी एवं घाघरा नदी में पानी का जलस्तर इस कदर बढ़ गया था, जिससे भयंकर जान-माल की तबाही हुई थी। 
 
बाढ़ नियंत्रण के लिए नोडल अधिकारी नामित 
डीएम आकाश दीप ने एडीएम, एएसपी, सीएमओ, डीएसओ, अधिशाषी अभियंता प्रांतीय खंड, अधिशाषी अभियंता सिंचाई खंड प्रथम, अधिशाषी अभियंता शारदानगर और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को नोडल अधिकारी नामित किया है। बाढ़ राहत कार्यों में त्वरित गति से सहायता पहुंचाने के लिए इन अफसरों की जवाबदेही रहेगी। 
 
खुला नियंत्रण कक्ष पर टेलीफोन नंबर नहीं 
डीएम के कैंप कार्यालय में नियंत्रण कक्ष खोला गया है, जिसकी तर्ज पर तहसील मुख्यालयों पर नियंत्रण कक्ष खोलने के निर्देश दिए गए हैैं। इन पर 24 घंटे कर्मचारियों की ड्यूटी रहेगी और सूचनाएं दर्ज कराई जा सकेंगी। हालांकि अभी कोई टेलीफोन नंबर या मोबाइल नंबर उपलब्ध नहीं कराया गया, जिस पर लोग सूचनाएं दे सकें।
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हालात जरूर हैं, लेकिन अभी बाढ़ से कोई गांव प्रभावित नहीं हुआ है। सभी एसडीएम और तहसीलदार को बाढ़ चौकियों को सक्रिय करने के निर्देश दिए गए हैैं। बाढ़ की दशा में विस्थापितों की जान-माल की सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। 
- एसपी सिंह, एडीएम
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