लखीमपुर खीरी। दो चीनी मिलों पलिया और ऐरा ने इस वर्ष चार माह में 5.70 अरब से ज्यादा मूल्य का गन्ना किसानों से खरीद लिया है, लेकिन इसके सापेक्ष एक रुपये का भुगतान किसानों को नहीं दिया है। कमोवेश यही हाल गोला और खंभारखेड़ा चीनी मिलों का हैं, जिन्होंने खानापूर्ति के तौर पर क्रमश: 1.30 प्रतिशत (चार नवंबर 2019 तक) और 1.25 प्रतिशत (पांच नवंबर 2019 तक) ही भुगतान किया है। इस कारण हजारों किसान परेशान हैं, जिन्हें गन्ना मूल्य का भुगतान न मिलने से होली फीकी रहने का डर सता रहा है।
जनपद में कुल नौ चीनी मिलें संचालित हैं, जिनमें करीब 4.50 किसान परिवार गन्ना बेचकर जीवन यापन करते हैं। गन्ना एक्ट के मुताबिक किसानों को गन्ना खरीद की तिथि से 14 दिन के अंदर गन्ना मूल्य का भुगतान किया जाना अनिवार्य है, लेकिन चार मिलों गोला, पलिया, खंभारखेड़ा और ऐरा की स्थिति भुगतान के मामले में सबसे फिसड्डी है। गोला और खंभारखेड़ा ने कुछ किसानों को नाममात्र का भुगतान किया है, जबकि पलिया और ऐरा ने एक दिन का भी भुगतान नहीं किया है। अजबापुर मिल को छोड़कर आठ मिलों पर गन्ना एक्ट के मुताबिक 14 दिन पूर्व तक करीब 12.37 अरब से अधिक गन्ना मूल्य बकाया हो चुका है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसानों को कितनी आर्थिक तंगी से जूझना पड़ रहा है। यहीं 12 अरब रुपये किसानों की जेब में होते तो उनके परिवारों की होली रंगीन होती और बाजार भी गुलजार हो जाते। 14 दिन पूर्व तक गोला मिल पर तीन अरब 82 करोड़ 28 लाख, पलिया पर दो अरब 75 करोड़ 34 लाख, खंभारखेड़ा पर दो अरब 65 करोड़ 30 लाख और ऐरा मिल पर दो अरब सात करोड़ 8ल9 लाख रुपये किसानों का बकाया हो चुका है। इसके अलावा चार मिलों कुंभी, गुलरिया, संपूर्णानगर औैर बेलरायां पर भी करोड़ों रुपये बकाया हो चुका है।
होली से पहले किसानों को ज्यादा से ज्यादा बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए मिलों को नोटिस जारी कर जल्द भुगतान करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
-शैलेंद्र कुमार सिंह, डीएम