लखीमपुर खीरी। कोरोना महामारी के चलते करीब 70 दिन लॉकडाउन लागू होने के बावजूद चीनी मिलों ने अपनी रफ्तार कायम रखी, जिससे 16198 क्विंटल चीनी अधिक उत्पादन करके पिछले वर्ष के उत्पादन रिकार्ड को ब्रेक कर दिया है। जनपद की सभी नौ चीनी मिलों ने पेराई सत्र 2019-20 में एक करोड़ 41 लाख 67 हजार 608 क्विंटल चीनी उत्पादन किया है, जबकि पिछले वर्ष 2018-19 में एक करोड़ 41 लाख 51 हजार 410 क्विंटल चीनी उत्पादन हुआ था।
कृषि अर्थव्यवस्था आधारित इस जनपद की मुख्य फसल गन्ना है, जिससे करीब 4.50 लाख से अधिक किसान परिवार जुड़े हैं। गन्ना उत्पादन में अग्रणी जनपद होने के कारण गन्ना किसान यहां की नौ चीनी मिलों के अलावा पड़ोसी जनपद सीतापुर की हरगांव चीनी मिल को भी गन्ना सप्लाई करते हैं। इस पेराई सत्र में नौ मिलों ने 1274.66 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई करके भी नया रिकार्ड स्थापित किया है, क्योंकि पिछले वर्ष भी रिकार्ड उत्पादन होने से मिलों ने 1218.70 लाख क्विंटल गन्ना पेराई की थी। इसके एवज में किसानों को 41 अरब 54 करोड़ 82 लाख 72 हजार रुपये गन्ना मूल्य भुगतान किया जाना है, जिसके सापेक्ष अब तक मिलों ने 45.98 प्रतिशत धनराशि का भुगतान किया है। जबकि सभी नौ मिलों पर गन्ना किसानों का 22 अरब 44 करोड़ 35 लाख रुपये बकाया है। बजाज ग्रुप की गोला, पलिया, खंभारखेड़ा और बलरामपुर ग्रुप की कुंभी मिल ने पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष अधिक चीनी उत्पादन किया है, जबकि गोविंद शुगर मिल ऐरा, बलरामपुर ग्रुप की गुलरिया और डीएससीएल श्रीराम ग्रुप की अजबापुर मिलों का चीनी उत्पादन कम हुआ है। सहकारी क्षेत्र की संपूर्णानगर और बेलरायां मिलों ने भी पिछले वर्ष से अधिक चीनी उत्पादन किया है।
इस पेराई सत्र में कम रहा चीनी परता
चीनी मिलों में उत्पादन चीनी परता (रिकवरी) पर बहुत हद तक निर्भर करता है। पिछले वर्ष के मुकाबले गोला, खंभारखेड़ा, ऐरा, अजबापुर, कुंभी, गुलरिया मिलों में चीनी परता कम रहा है। सबसे अधिक 1.59 प्रतिशत की कमी अजबापुर चीनी मिल में आई, जहां पिछले वर्ष चीनी परता 12.23 प्रतिशत था लेकिन इस वर्ष 10.64 प्रतिशत रहा। इसके अलावा सहकारी क्षेत्र की संपूर्णानगर और बेलरायां मिल में चीनी परता पिछले वर्ष से अधिक रहा है।
किसानों ने पिछले पांच वर्षों में गन्ना उत्पादन लगातार बढ़ाया है, जिससे चीनी उत्पादन में लगातार वृद्धि हुई है। हर साल अधिकतर चीनी मिलें पिछले वर्ष के रिकार्ड को ब्रेक करने में सफल रही हैं। सभी मिलों में पेराई सत्र समाप्त हो चुका है। इसलिए गन्ना मूल्य भुगतान जल्द कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
-ब्रजेश कुमार पटेल, जिला गन्ना अधिकारी