ज्योतिषाचार्य दिवाकर मिश्रा। संवाद
गोला गोकर्णनाथ। भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव सोमवार को रोहिणी नक्षत्र में अर्धरात्रि को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।
नगर के पश्चिमी दीक्षिताना निवासी ज्योतिषाचार्य दिवाकर मिश्र ने बताया कि भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि एवं रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। रात्रि में 12:00 बजे खीरे की नाल काटकर भगवान का जन्म करने की परंपरा है। अतः इस दिन पूजन में खीरे का विशेष महत्व है। देश के विभिन्न क्षेत्रों में दही-हांडी का आयोजन होता है।
इस दिन व्रत, पूजा-अर्चना, झांकी सजाना, रासलीला और दही हांडी जैसे कार्यक्रमों का आयोजन होता है। जन्माष्टमी पर भक्तजन भगवान कृष्ण की लीलाओं और आदर्शों को स्मरण करते हैं। इस वर्ष 26 अगस्त सोमवार को 8:20 बजे से अष्टमी तिथि लग जाएगी एवं रोहिणी नक्षत्र भी रात में 9:10 से प्रारंभ हो जाएगा।
इस प्रकार अर्धरात्रि में अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र एवं साथ ही सोमवार का दिन मिल जाने से जयंती योग का उत्तम अवसर प्राप्त हो रहा है। अतः सोमवार को ही श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाया जाना फलकारी होगा।
सूर्योदय कालिक अष्टमी एवं रोहिणी नक्षत्र का संयोग 27 अगस्त मंगलवार को प्राप्त हो रहा है। अतः कुछ विशिष्ट वैष्णव 27 अगस्त मंगलवार को भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाएंगे।