सिंघिया मे नदी में समाता आशादेवी का मकान। संवाद
निघासन। शारदा नदी का कटान थमने का नाम नहीं ले रहा। ग्रंट नंबर 12 गांव में बुधवार को तेजाना, प्रकाश, अनिल कुमार, कौशल, रोशन, विनोद, संजय और अच्छेलाल की आठ झोंपड़ियां देखते ही देखते नदी की धाराओं में बह गईं। मंगलवार देर शाम रत्तीराम यादव का पक्का मकान भी शारदा में समा गया था। ग्रामीणों ने बताया कि अब तक तीन इंटरलॉक सड़कें, दो प्राचीन मंदिर, करीब 123 पक्के मकान और अनगिनत मवेशी नदी के आगोश में समा चुके हैं।
कटान से बेघर हुए परिवार सड़क किनारे अस्थायी ठिकाने डालकर रातें गुजारने के लिए मजबूर हैं। कई परिवार अपने घरों को शारदा के हवाले कर बेघर होकर दर-दर भटक रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि संकट की इस घड़ी में न जनप्रतिनिधि दिखाई दे रहे हैं और न ही प्रशासन मदद के लिए तैयार है। लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की लापरवाही से कटान पीड़ितों की दशा दिन ब दिन और बदतर होती जा रही है।
सिंघिया मे नदी में समाता आशादेवी का मकान। संवाद