दो दिन लगातार वर्षा के बाद बनबसा बैराज से छोड़े गए अतिरिक्त पानी से शारदा नदी उफना गई है। इससे उसके समीपवर्ती दर्जनों गांवों का निचला इलाका बाढ़ की चपेट में आ गया है। खेतों में पानी भर जाने की वजह से गन्ने की निकासी बंद हो गई है तो गेहूं और लाही की फसल चौपट हो गई है, जिससे किसानों के माथे पर बल पड़ गए हैं।
रविवार और सोमवार को तकरीबन सभी इलाकों में हुई बारिश के बाद बनबसा बैराज से अतिरिक्त पानी की रिलीजिंग की गई, जिससे यहां शारदा नदी का जलस्तर मंगलवार की शाम को काफी बढ़ गया। नदी खतरे के निशान को पार कर करीब 28 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई। नदी के खतरे के निशान से ऊपर पहुंचते ही उसके समीपवर्ती मेलाघाट, खैरहना, मरौचा, नगला आदि गांवों का निचला खेतीहर इलाका बाढ़ की चपेट में आ गया। यहां के खेतों में पानी भर गया, जिससे फसल के क्षतिग्रस्त होने की आशंका बढ़ गई और खेतों से गन्ने की निकासी भी बंद हो गई। इसके साथ ही मझगईं परिक्षेत्र में नदी के समीपवर्ती गांव कुंवरपुर, दुबहा, खालेपुरवा, नयापुरवा, चौरी आदि का खेतीहर इलाका भी बाढ़ से प्रभावित हुआ है और यहां के खेतों में खड़ी गन्ना, लाही और गेहूं की फसल डूब गई है। खेतों में पानी भरने से गन्ने की निकासी भी बंद हो गई है।
बारिश ने किया किसानों को बर्बाद
किसान पहले गन्ना भुगतान न होने के कारण परेशान थे फिर ओलावृष्टि ने उसकी कमर तोड़ दी। इसके बाद दो दिन की बारिश ने उसकी गेहूं, लाही, मसूर आदि फसलें भी तबाह कर दी। ऐसे में किसान बर्बाद हो गए हैं। हालांकि नदी का जलस्तर बुधवार को घटने लगा है लेकिन खेतों में घुसा पानी अभी कम नहीं हो रहा है।
नाव से फसल उखाड़ लाए तमाम किसान
कुछ गांव के निचले खेतीहर इलाकों में आए बाढ़ के पानी के कारण फसलें बुरी तरह डूब गईं है। इन खेतों से पानी के जल्द निकलने के आसार न होने के कारण तमाम किसान नाव से वहां पहुंचकर फसलों को ही उखाड़ लाए। उनका तर्क है कि पानी में डूब कर खराब तो इसे होना ही था ऐसे में कम कम से वह जानवारों को खिलाने के काम तो आ जाएंगी।