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शारदा और घाघरा का बढ़ने लगा जलस्तर, लोग परेशान

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फूलबेहड़ के गांव जंगल नंबर 11 में रास्ते में भरा शारद नदी का पानी। - फोटो : LAKHIMPUR
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इस बार अच्छी बारिश की संभावनाओं से एक तरफ जिले के किसानों में खुशी हैं, वहीं नदियों किनारे बसे लोगों की बाढ़ की आशंका से नीद उड़ गई है। जहां शारदा नदी का जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया है, वहीं घाघरा और मोहाना भी कटान करने के लिए तैयार नजर आ रही हैं। बाढ़ से हर साल प्रभावित होने वाले लोगों ने अभी से सुरक्षित स्थानों की तलाश शुरू कर दी है।
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जिले में शारदा, घाघरा, मोहाना, सुहेली और कौडियाला नदी बारिश के मौसम में तबाही लेकर आती हैं। पलिया में शारदा और सुहेली नदियां बाढ़ का कारण बनती हैं तो निघासन तहसील के बड़े क्षेत्र में शारदा, घाघरा, मोहाना और सुहेली नदियां तबाही का कारण बनती हैं। धौरहरा में शारदा और घाघरा नदियों से दर्जनों गांव प्रभावित होते है। बाढ़ से प्रभावित होने वाली तहसीलों में पलिया, निघासन, धौरहरा और लखीमपुर हैं, जबकि गोला तहसील आंशिक रूप से प्रभावित होती है। मोहम्मदी और मितौली तहसीलों में बाढ़ का प्रभाव नहीं होता है।
बाढ़ यहां होने वाली बारिश से नहीं आती बल्कि बनबसा बांध से अधिक मात्रा में पानी शारदा नदी में छोड़े जाने से बाढ़ की स्थिति बनती है। फूलबेहड़ ब्लाक के जंगल नंबर 11 में इन दिनों रास्ते तक पर पानी भर गया है, जिसमें होकर लोग निकल रहे हैं। वहीं ईसानगर में घाघरा नदी अभी स्थिर है, लेकिन कभी भी कटान शुरू हो सकता है। इससे लोग चिंतित हैं। नेपाली नदियों मोहाना और कर्णाली के शारदा और घाघरा नदियों में मिलने से नेपाल से आने वाला पानी निघासन तहसील क्षेत्र में कहर ढाता है। बाढ़ से बचाव का स्थाई समाधान न होने से नदियों के किनारे बसे लोगों की हर साल बाढ़ झेलना, उजड़ना, बसना और फिर उजड़ना नियति बन गई है।
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निघासन इलाके में बाढ़ के समय सौ से अधिक गांव प्रभावित होते हैं। इसके अलावा बैलहा, मिठुई, ठाकुर पुरवा, लालबोझी, शंकरीगौढ़ी, प्रतापगढ़, बबुरी समेत करीब एक दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क कट जाता है।
प्रशासन की बाढ़ और कटान से बचाव की तैयारियां
जिला प्रशासन ने बाढ़ और कटान से बचाव की तैयारियां पूरी कर ली हैं। बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में बचाव के लिए नावें तैयार कर ली गई हैं। जिले में कुल 21 बाढ़ केंद्र और 40 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं।
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तहसील प्रभावित गांव बाढ़ केंद्र बाढ़ चौकियां
लखीमपुर.........16...............4....................4
मोहम्मदी..........00...............2....................2
निघासन...........18...............4...................12
धौरहरा.............21..............4...................06
गोला...............00...............1...................03
पलिया.............12 ..............6...................12
मितौली............00...............0...................01
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योग................67...............21..................40
क्या कहते हैं लोग.....
बोझवा गांव के दिनेश कुमार ने बताया कि नदी बढ़ने से उनकी फसलों पर काफी प्रभाव पड़ा है। साथ ही ठोकर नंबर एक से गुजरकर खेतों में जाने से उनको दिक्कतें आ रही हैं। यहां पर चार से पांच फिट पानी चल रहा है। जलस्तर बढ़ने व घटने से नदी ने कटान भी भूमि पर तेज कर दिया है। जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है।
मझौरा गांव निवासी नीरज कुमार ने बताया कि नदी का जलस्तर बढ़ने से उनके गांव के जाने वाले रास्ते पर पानी भर जाता है। जिससे निकलने में दिक्कतें आती हैं। खेत नदी के पार होने के कारण उनको नाव से अपने खेतों की ओर जाना पड़ता है। जिससे कठिनाईयां होती हैं और खेतों में भी पानी भर जाता है।
मटैहिया गांव के रामविलास का कहना है कि वह बीते कई साल से बाढ़ की विभाषिका देख रहे हैं। बाढ़ हर बार उनको खाने का मोहताज बना देती है लेकिन इसके बाद भी वह फिर से अपनी जीविका चलाते हैं और किसी तरह से अपने परिवार व बच्चों का पालन पोषण करते हैं। कहा कि खेती ही एकमात्र जरिया है लेकिन खेतों में पानी भरने से फसल को नुकसान होता है।
दौलतापुर गांव के सेठ यादव ने बताया कि उनका खेत रेलवे लाइन के पास शारदा नदी की ओर है। जब नदी का जलस्तर बढ़ता है तो नदी का पानी उनके खेतों में भर जाता है जिससे हर साल उनकी फसल बर्बाद होती है। इस बार धान की बुआई की थी सोंचा था कि नदी का पानी जल्दी नहीं पहुंचेगा लेकिन जलस्तर बढ़ने से नदी उनकी फसल को भी बर्बाद कर सकती है।
श्रीनगर गांव के सीताराम ने बताया कि उनका घर नदी किनारे है। प्रशासन की तरफ से बंधा तो बनाया गया है लेकिन गांव के स्कूल के पास कोई सार्थक प्रयास नहीं किए गए हैं जिससे वहां से कटान का खतरा मंडरा रहा है। बताया कि श्रीनगर के पास पेड़ व बांस डालकर कटान रोकने की कोशिश की गई है लेकिन प्रशासन की तरफ से अभी कटान रोकने के कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
ईसानगर के गांव नारीबेहड़ निवासी विश्चासेन वर्मा कहते हैं कि उनका खेत घाघरा नदी के किनारे है। बादल घिरते हैं तो ऐसा लगता है कि नद ी उनका खेत काट रही है। कई बार नींद टूट जाती है, फिर रात जागकर काटनी पड़ती है। जब नदी का जलस्तर बढ़ता है तो नदी का पानी उनके खेतों में भर जाता है जिससे हर साल उनकी फसल बर्बाद होती है।
नारीबेहड़ गांव के ही दिनेश कुमार ने बताया कि नदी का जलस्तर बढ़ने से उनके गांव के जाने वाले रास्ते पर पानी भर जाता है, जिससे निकलने में दिक्कतें आती हैं। हर साल नदी कटान करती है। तीन बीघा खेत पिछले साल कट गया था। इस बार कटान न हो, इसको लेकर मन्नत मानी है। पानी ज्यादा बरसेगा तो कटान जरूर होगा।
बाढ़ और कटान से बचकाव के लिए इस बार रिकार्ड कार्य कराए गए हैं। बाढ़ चौकियां भी बना दी गई हैं। हालांकि अभी कहीं बाढ़ की स्थिति नहीं है, इसलिए स्टाफ तैनात नहीं किया गया है। फिलहाल गांव वाले भी अलर्ट हैं। बाढ़ और कटान से निपटने के लिए प्रशासन तैयार है। किसी भी पीड़ित को कोई समस्या नहीं आने दी जाएगी।
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शैलेंद्र कुमार सिंह, डीएम
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