लखीमपुर खीरी। युवराज दत्त महाविद्यालय के कक्ष संख्या 35 में मंगलवार की दोपहर का नजारा किसी सामान्य क्लास से हटकर था। बीए और बीएससी के छात्र-छात्राएं पढ़ाई खत्म होने के बाद अपनी-अपनी कुर्सियों पर बैठकर भविष्य की राहों पर खुलकर चर्चा कर रहे थे।
बीए की छात्रा फिजा ने कहा कि अब केवल डिग्री ही काफी नहीं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करनी होगी। उनकी सहपाठी रानी ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि लड़कियों को भी प्रशासनिक सेवाओं में आगे आना चाहिए, तभी असली बदलाव होगा।
बीएससी के छात्र रमेश कुमार ने बात रखी कि रिसर्च और साइंस के क्षेत्र में भी ढेरों मौके हैं। इसके लिए बस सही मार्गदर्शन और मेहनत की जरूरत है। वहीं, सरताज अली ने माना कि काउंसलिंग सेशन नियमित हों तो छात्रों की दुविधा दूर हो सकती है।
चर्चा के दौरान जब बीए की छात्रा साक्षी ने मजाक में कहा कि पहले तो यहां से पास होना है, फिर आईएएस बनना है, तो पूरा कक्षा ठहाकों से गूंज उठा। छात्रों का मानना था कि रोजगार की चुनौती बड़ी है, लेकिन आत्मविश्वास और मेहनत से उसे जीता जा सकता है।
खास बात यह रही कि छात्राओं राधा, सादिया, अना ने बातचीत में नेतृत्व किया और कॅरिअर को लेकर अपना स्पष्ट दृष्टिकोण भी साझा किया।
कक्ष 35 की यह अनौपचारिक बैठक छात्रों के लिए केवल चर्चा नहीं, बल्कि एक-दूसरे को प्रेरित करने का मंच भी साबित हुई। महाविद्यालय का यह नजारा बताता है कि नई पीढ़ी सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं, बल्कि अपने भविष्य की दिशा तय करने के लिए सजग और सक्रिय है।