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Lakhimpur Kheri News: महिला व किसानों के लिए आत्मनिर्भरता का केंद्र बना सरसवा हाट बाजार

Wed, 25 Feb 2026 11:04 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
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सरसवा गांव के हाट बाजार में लगी दुकानें। संवाद
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धौरहरा। विकास खंड के गांव सरसवा में संचालित हाट बाजार अब सिर्फ खरीद-फरोख्त का स्थान नहीं, बल्कि यह आत्मनिर्भरता और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का माध्यम बन गया है। स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं महिलाएं, किसान और छोटे व्यापारी इस बाजार से आय बढ़ा रहे हैं।
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हाट बाजार को तहसील क्षेत्र का पहला बाजार बनाते हुए 13,51,000 रुपये की लागत से निर्माण कराया गया। इसमें 16 टिनशेड और 120 दुकानें बनाई गई हैं। स्वच्छता के लिए शौचालय, पेयजल की सुविधा और सोलर लाइट भी लगाई गई हैं।
बाजार में करीब 40 महिलाएं नियमित रूप से दुकान चला रही हैं, जबकि शुरुआत में यह संख्या 15-20 थी। सरसवा की उमा देवी, सावित्री देवी, गंगाजली व गुदरिया निवासी सुषमा, सुमन देवी एवं बेलवा मोती निवासी शकुंतला देवी व मुन्नी देवी का कहना है कि पहले मासिक आय 2-3 हजार रुपये तक सीमित थी, लेकिन अब औसतन आय 6-10 हजार रुपये हो रही है। आय बढ़ने से बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और घर के खर्च में सुविधा हुई है। महिलाएं अब परिवार के निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं और उनका आत्मविश्वास बढ़ा है।
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उन्होंने बताया कि प्रतिदिन 300–500 ग्राहक बाजार में आ रहे हैं। औसतन एक दुकान की दैनिक बिक्री 1,500–3,000 रुपये तक हो रही है। सब्जियां, मसाले, अचार, पापड़, हस्तशिल्प और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की मांग सबसे अधिक है। शहर के बाजार की तुलना में यहां दाम कम और ताजगी अधिक है, जिससे ग्राहकों की संख्या बढ़ रही है।
-अन्नदाताओं को भी हो रहा फायदा
सरसवा, गुदरिया, हरदी और बेलवा के किसान बताते हैं कि हरी सब्जियां, सरसों का साग, दालें और स्थानीय अनाज की बिक्री बढ़ी है। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम हुई और भुगतान तुरंत मिल जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में ही बाजार लगने से समय और किराया दोनों की बचत हो रही है। बाजार से करीब 400 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है, जबकि ढुलाई, पैकिंग और ठेला संचालन से कई लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार भी मिल रहा है। साप्ताहिक रूप से लाखों रुपये का कारोबार हो रहा है, जिससे गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।
-सेल्फी प्वाइंट और लाइटिंग बना आकर्षण-
त्योहारों पर विशेष स्टॉल और लाइटिंग के अलावा सेल्फी प्वाइंट भी युवाओं का आकर्षण बन गया है। युवा और युवतियां सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर रील भी बना रहे हैं। कुल मिलाकर, महिला हाट बाजार ग्रामीण क्षेत्र में आर्थिक सशक्तीकरण और स्थानीय विकास की नई तस्वीर पेश कर रहा है, जहां आत्मनिर्भरता के साथ स्थानीय विकास को नई दिशा मिली है।
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हाट बाजार से जहां स्वयं सहायता समूह और अन्य ग्रामीण आत्मनिर्भर बने हैं, वहीं ग्राम पंचायत के राजस्व में भी वृद्धि हुई है।
-संदीप तिवारी, खंड विकास अधिकारी
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