लखीमपुर खीरी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मुस्तफाबाद स्थित कबीरधाम आश्रम में आयोजित असंग देव भक्त भवन के शिलान्यास समारोह में कहा कि पहले भारत को हेय दृष्टि से देखा जाता था, लेकिन अब समय बदल गया है। आज दुनिया हमारी ओर उम्मीद भरी नजरों से देखती है। क्या हम उस अपेक्षा को पूरा कर रहे हैं, यह भी हमें समझना होगा।
संघ प्रमुख ने कहा, दुनिया सुख-समृद्धि और शांति का रास्ता चाहती है। यह रास्ता भारत से ही मिलेगा। हमें दुनिया को जीतकर नहीं, बल्कि जोड़कर प्रभावित करना है। संघ प्रमुख ने अपने उद्बोधन में सनातन संस्कृति की विशेषता को रेखांकित करते हुए कहा कि हमारे पूर्वज मैक्सिको से लेकर साइबेरिया तक गए। वहां के लोगों को ज्ञान और संस्कृति का उपहार दिया, परंतु हमने किसी को पराजित नहीं किया। किसी देश पर कब्जा नहीं किया, किसी का धर्म परिवर्तन नहीं कराया। प्रेम ही भारत का संदेश है और वैसा ही हम सब का जीवन होना चाहिए।
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भागवत ने राष्ट्र को एकता का संदेश देते हुए कहा कि पंथ-सम्प्रदाय विवाद के लिए नहीं हैं। उपासना ठीक से हो तो कोई विवाद नहीं। उपासना ऐसी करनी है, जिससे सत्य की प्राप्ति हो। हम सब एक हैं। भले ही हमारी भाषा अलग हो, हमारे क्षेत्र अलग हों, हम विभिन्न धर्म को मानने वाले हों, पर हमारी एक ही माता है और वह भारत माता हैं। उनकी भक्ति को हमें सदैव आगे रखना है।
संघ प्रमुख ने कहा, अनेक भाषाओं व अनेक धर्मों को मानने वाले भारत में हैं, इसका उल्लेख अथर्ववेद में भी है। विविधताओं को सहन नहीं, स्वीकार करना सीखो, सम्मान करना सीखो। उन्होंने कहा, हमारे यहां परिवार ही समाज की इकाई है, व्यक्ति नहीं। यहां परिवार महत्वपूर्ण है। भारत संतों का देश है, उनसे सीखकर हम आगे बढ़ें।