लखीमपुर खीरी। गोला से लखीमपुर होते हुए 30 से अधिक रोडवेज बसें लखनऊ जाती हैं। वैसे तो सभी बसों को लखीमपुर बस स्टाॅप से होकर लखनऊ जाना चाहिए। लखनऊ से आने वाली बसें लखीमपुर बस स्टाॅप से होकर आगे जानी चाहिए, लेकिन अधिकांश चालक मनमानी दिखाते हैं। चालक लखीमपुर स्टाॅप पर बस नहीं लाते। शहर के बाहर से ही चले जाते हैं।
रोडवेज बस चालकों की यह मनमानी आज से नहीं बल्कि पिछले काफी समय से चल रही है। बीच में कई बार यात्रियों ने इसका विरोध भी किया, लेकिन कोई खास असर नहीं पड़ा। गोला से लखीमपुर होते हुए लखनऊ जाने वाली 30 से अधिक बसें हैं, जिसमें 25 प्रतिशत से अधिक बसें लखीमपुर बस स्टाॅप नहीं जाती हैं। यह एलआरपी चौराहे से निकल जाती हैं। सवारियों को बाइपास पर ही उतार देते हैं।
विकास भवन सहित कई सरकारी कार्यालय व बाजार आने वाले लोगों को एलआरपी से ई-रिक्शा पकड़कर शहर के अंदर आना होता है। इसको लेकर अक्सर सवारियों और चालकों में विवाद भी होता है। लखीमपुर डिपो के इंचार्ज नफासत अली ने बताया कि उनके डिपो की बसें बस स्टाॅप पर आती हैं। जो बसें लखीमपुर स्टाॅप पर नहीं आती है वह अन्य डिपो की होंगी।
रोडवेज बस स्टाॅप पर इंतजार करते रह जाते यात्री
लखीमपुर बस स्टाप पर पीलीभीत, उत्तराखंड, बरेली, शाहजहांपुर सहित कई डिपो बसों का स्टाॅपेज है। सभी डिपो की बसों को यहां आना चाहिए और आती भी हैं, लेकिन कभी-कभी चालक मनमानी दिखा देते हैं, जिसकी वजह से यात्री इंतजार करते रह जाते है। उत्तराखंड और पीलीभीत डिपो के चालक अक्सर मनमानी दिखाते हैं।
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लांग रूट की एक भी बसें नहीं आती स्टाॅप पर
यहां पर लांग रूट की एक भी बस नहीं आती है। यह बसें हाईवे से निकल जाती हैं। बहराइच, बस्ती, गोंडा, गोरखपुर से दिल्ली, जयपुर, मेरठ, अलीगढ़ आदि जगहों की बसों का आना-जाना रहता है, जो सभी की सभी बाहर-बाहर ही निकल जाती हैं। अगर यह बसें लखीमपुर बस स्टाॅप आने लगें तो लोगों को लंबे रूट का सफर आसान हो जाएगा, लेकिन इस संबंध में कोई भी कुछ कहने और करने को तैयार नहीं है।
जाम में फंस जाती हैं बसें, नहीं मिलती सवारियां
लखीमपुर स्टाॅप पर बसों को न लाने के पीछे कुछ चालकों से बात की तो उन्होंने कहा कि शहर के अंदर बसों को आने से कई नुकसान हैं। एक तो शहर के जाम में बसें फंस जाती है, दूसरी सवारियां प्राप्त न मिलने की वजह से इनकम नहीं हो पाती है।