लखीमपुर खीरी। गर्मी में आग की घटनाएं बढ़ जाती हैं, लेकिन परिवहन निगम गंभीर नहीं है। डिपो की अधिकांश रोडवेज बसें बिना अग्निशमन यंत्र के सड़कों पर दौड़ रही हैं। कुछ में अग्निशमन यंत्र लगे भी हैं, जो एक्सपायर हो चुके हैं। विभागीय अफसर ध्यान नहीं देते हैं। ऐसे में अगर बस में आग की घटना होती है तो उसको बुझाना मुश्किल हो जाएगा।
जनपद में लखीमपुर और गोला डिपो पर 220 से अधिक रोडवेज बसें हैं। जिसमें गोला डिपो पर निगम की 104 बसे हैं और शेष अनुबंधित हैं। सड़कों पर दौड़ने वाली अधिकांश बसों में फायर सिलिंडर नहीं है। सरकारी ही नहीं, बल्कि निजी भी आग बुझाने के कोई इंतजाम नहीं हैं। इन बसों में अग्निशमन यंत्र या तो गायब हैं या फिर मात्र शोपीस बने हैं।
बुधवार को पड़ताल में कुछ बसों में अग्निशमन यंत्र देखने को मिल रहा है, लेकिन कई बसों में नहीं मिला। जबकि परिवहन विभाग की ओर से सड़क सुरक्षा माह पर बस मालिकों व चालकों को यातायात नियमों का पाठ भी पढ़ाया जाता है, लेकिन बसों में अग्निशमन यंत्र लगाने के लिए कभी भी प्रेरित नहीं जाता।
बसों में फर्स्ट एड बॉक्स भी नहीं
फायर सिलिंडर छोड़िए, रोडवेज बसों में फर्स्ट एड बॉक्स भी नहीं है। जबकि शासन ने फर्स्ट एड बॉक्स को लेकर सख्त निर्देश जारी किए थे। पड़ताल में अधिकांश बसों में फर्स्ट एड बॉक्स नहीं पाया गया। कुछ में पाया गया तो उसमें दवाइयां नहीं थीं। जबकि बसों में फर्स्ट एड बॉक्स होना जरूरी है, ताकि अगर रास्ते में किसी को हल्की चोट लगे, तो उसका प्राथमिक उपचार किया जा सके।
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यात्रियों की सुरक्षा को लेकर बारीकी से ध्यान रखा जाता है। बसों की निरंतर जांच की जाती है। हमारी डिपो की सभी बसों में अग्निशमन यंत्र लगे हैं। पिछले दिनों एक बस बिना फायर सिलिंडर मिली थी, उसको हटवा दिया था।
-नफासत अली, वरिष्ठ केंद्र प्रभारी, लखीमपुर डिपो
लखीमपुर बस स्टेशन पर खड़ी बस में फायर सिलेंडर का हुक लगा लेकिन सिलेंडर नहीं। संवाद
लखीमपुर बस स्टेशन पर खड़ी बस में फायर सिलेंडर का हुक लगा लेकिन सिलेंडर नहीं। संवाद