लखीमपुर डिवीजन में राजस्व वसूली को लेकर अधिकारियों की लापरवाही से दिनोंदिन बकाया बढ़ता जा रहा है। खासकर शहरी क्षेत्र में तो हालात बेहद खराब हैं। यहां 42 हजार बिजली उपभोक्ताओं में सिर्फ 17 हजार ही नियमित रूप से बिजली बिल जमा कर रहे हैं। अन्य 25 हजार उपभोक्ताओं पर करीब 30 करोड़ रुपया बकाया हो गया है।
बिजली विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो शहर में राजस्व का बकाया तेजी से बढ़ा है। मार्च-अप्रैल माह के बाद न तो कहीं शिविर लगाए गए हैं और न ही डोर टू डोर अभियान ही चला है। नतीजतन, अधिकारियों ने इसमें कोई खास दिलचस्पी नहीं ली। जिसकी वजह से घरेलू, कामर्शियल और पावर के बकाएदार उपभोक्ताओं की संख्या भी बढ़ती चली गई। यहां बता दें कि शहरी क्षेत्र में घरेलू उपभोक्ताओं पर करीब 22 करोड़ रुपये, कामर्शियल के चार हजार कनेक्शनों पर छह करोड़ और पावर के 100 कनेक्शनों पर दो करोड़ रुपये से अधिक का बिजली बिल बकाया है। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो शहरी क्षेत्र में बिजली का बकाया 20 करोड़ के आसपास था, लेकिन वसूली अभियान न चलने और शिविर न लगने से बकाया बढ़कर 30 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
एसडीओ टाउन राहुल शर्मा ने बताया कि बकाया वसूली के लिए विभाग के अधिकारी डिवीजन स्तर पर लक्ष्य निर्धारित करते हैं। जिसके बाद अभियान चलाकर राजस्व वसूली की जाती है। सबसे ज्यादा शहरी क्षेत्र के उपभोक्ता ही राजस्व जमा कर रहे हैं। जिससे लक्ष्य पूरा हो रहा है।
सरकारी बकाएदारों में पुलिस अव्वल
डिवीजन में सरकारी बकाएदारों में पुलिस पर सबसे ज्यादा करीब एक करोड़ रुपया बकाया है। इसी क्रम में शिक्षा, स्वास्थ्य, कारागार, विकास भवन, कलक्ट्रेट, वन विभाग पर लाखों रुपये का बिजली बकाया है। हालांकि सरकारी विभागों से मार्च महीने में बिजली बिल जमा किया जाता है लेकिन पुलिस समेत कई विभाग ऐसे हैं, जो कभी पूरा बिल नहीं जमा करते है।