रामलीला कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के मुख्य मार्गों से निकलती सवारी
तिकुनिया। रामलीला मेले में निकलने वाली सवारी का तख्त और सिंहासन 72 साल पुराना है। इसको आज भी मेला कमेटी उपयोग में लाती है। इस बार यह मेला 30 अक्तूबर से लगेगा।
तिकुनिया रामलीला मेला कस्बे के व्यापारी शिवलाल गुप्ता, रामस्वरूप गुप्ता, परसराम अग्रवाल, प्रभाती लाल अग्रवाल आदि ने 72 साल पहले शुरू कराया था। मेला भारत नेपाल सीमा के कस्बा तिकुनिया में सुथना देवी मंदिर प्रांगण में लगने से दूर-दूर के ग्रामीण पहुंचते हैं।
बुजुर्ग बताते हैं कि कस्बा तिकुनिया में पहले रामलीला मेला नहीं लगता था। यहां के लोग सिंगाही स्टेट में लगने वाला रामलीला मेला देखने जाते थे। एक बार कस्बे से व्यापारी शिवलाल गुप्ता, परशुराम अग्रवाल, रामस्वरूप गुप्ता, रामावतार अग्रवाल, प्रभाती लाल अग्रवाल, सिगाही स्टेट में लगने वाला दशहरा मेला देखने गए थे जहां मेला कमेटी के किसी व्यक्ति से वाहन खड़ा करने को लेकर विवाद हुआ। इसके चलते शिवलाल गुप्ता सहित साथ में गए व्यापारियों ने तय किया कि तिकुनिया में हम खुद मेला लगवाएंगे। इसके बाद 72 साल पहले दीपावली से 15 दिन पहले यह मेला शुरू हुआ। मेले में श्रीराम का सिंहासन और तख्त आज भी मौजूद है। इसी सिंहासन से राम लक्ष्मण सीता की सवारी रोजाना निकाली जाती है। रामलीला कमेटी के महामंत्री अजय गर्ग टीटू ने बताया कि इस बार मेला 30 अक्तूबर से लगेगा।
रामलीला कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के मुख्य मार्गों से निकलती सवारी