कामयाबी पर खुशियां मनाते वनाधिकारी,पशु चिकित्सक और गैंडा विशेषज्ञ। वन विभाग।
संवाद न्यूज एजेंसीबांकेगंज। करीब 200 साल पहले दुधवा के घने जंगलों में स्वच्छंद विचरण करने वाले गैंडों की संतानें एक बार फिर बेरोकटोक जंगल में विचरण कर सकेंगी। पहले चरण में तीन गैंडों को आजाद किया गया है, जल्द ही अन्य को भी बाड़े से रिहाई दी जाएगी।
गैंडों का प्राकृतवास रहे दुधवा के जंगलों से करीब दो सौ साल पहले एक सींग वाले गैंडे लुप्त हो गए थे। दुधवा नेशनल पार्क की स्थापना के बाद 1984 में असम से चार गैंडे लाकर दक्षिण सोनारीपुर रेंज में गैंडा पुनर्वासन योजना शुरू की गई थी। 40 साल के अंदर अब इन गैंडों की संख्या बढ़कर 46 हो गई है। अंत: प्रजनन के चलते आनुवांशिक दोषों से बचाव के लिए अप्रैल 2018 में बेलरायां रेंज में गैंडा पुनर्वासन योजना फेज टू शुरू की गई।
दुधवा में गैंडा पुनर्वासन योजना शुरू होने के 40 साल बाद सौर ऊर्जा चालित बाड़े से गैंडों को आजाद घूमने की आजादी देने की योजना बनाई गई। इसी के तहत 28 से 30 नवंबर के बीच एक नर गैंडा रघु और दो मादा गैंडा विजयश्री व दीपाली को रेडियो कॉलर लगाकर जंगल में छोड़ा गया है। अब यह तीनों गैंडे अपने पुरखों की धरती पर आजाद भ्रमण कर सकेंगे।
चरणबद्ध तरीके से आजाद किए जाएंगे गैंडे
गैंडों को सौर ऊर्जा चालित बाड़े से आजाद करने का यह पहला चरण था। योजना के मुताबिक इनमें एक नर और तीन मादा गैंडे आजाद किए जाने थे, लेकिन निर्धारित समय सीमा में केवल तीन गैंडे ही आजाद किए जा सके। दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी ललित कुमार वर्मा ने बताया कि यदि योजना कामयाब रही तो भविष्य में चरणबद्ध तरीके से और गैंडों को आजाद किया जाएगा।