गैंडा पुनर्वासन योजना की सफलता के बाद नस्ल सुधारने की कवायद
प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर पर दोनों राज्यों के बीच शुरू हुआ पत्राचार
लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व में गैंडा पुनर्वासन योजना की सफलता के बाद अब गैंडों की नस्ल को सुधारने और मजबूत बनाने की कवायद हो रही है। दुधवा में गैंडों की नस्ल में सुधार के लिए बंगाल से कुछ गैंडों को लाकर दुधवा के गैंडा परिवार में शामिल करने की योजना है। बंगाल के गैंडों का रक्त इस नस्ल में शामिल होने से गैंडों की नस्ल अधिक उन्नत होगी।
बंगाल से कुछ गैंडों को दुधवा लाने के लिए पत्राचार शुरू हो चुका है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने बंगाल सरकार को पत्र लिखकर कुछ गैंडों की मांग की है। बंगाल सरकार से सहमति मिलने के बाद वहां से गैंडों को लाकर पहले दुधवा के गैंडा पुनर्वासन क्षेत्र में ही जाएगा। दुधवा नेशनल पार्क में अप्रैल 1984 में असम के जंगलों से पांच गैंडे लाकर गैंडा पुनर्वासन योजना शुरू की गई थी। किसी स्थान से लुप्त हुए प्राणी को उनके पुरखों की धरती पर फिर से बसाने की विलक्षण योजना दुनिया में सबसे पहले दुधवा में ही शुरू की गई थी। दुधवा में असम से लाए गैंडों में नर गैंडा बांके के जरिए वंश वृद्धि शुरू हुई।
दुधवा में इस समय गैंडों का पूरा कुनबा ही बांके की वंश बेल है, लेकिन प्रजनन में विविधता के अभाव में दुधवा के गैंडों की नस्ल बिगड़ने (आनुवांशिक दोष) का खतरा पैदा हो रहा है। इसे देखते हुए वर्ष 2018 में गैंडा पुनर्वासन योजना फेज-2 की शुरुआत बेलरायां रेंज में की गई। इसमें तीन मादा और नेपाली नर गैंडे को रखा गया है। नेपाली गैंडे से जो संतानें पैदा हो रही हैं उससे नस्ल में कुछ विविधता आई है, लेकिन अब इसमें तीसरे रक्त को शामिल कर दुधवा के गैंडों की नस्ल को और अधिक मजबूत बनाने की योजना पर अब काम शुरू हुआ है। बंगाल से कुछ और नर और मादा गैंडों को लाकर दुधवा के गैंडा परिवार में शामिल करने की योजना बनाई गई है।
अब तक दुधवा में हैं असम और नेपाल के गैंडों का वंश
दुधवा टाइगर रिजर्व के सोनारीपुर रेंज जंगल में करीब तीस वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को सौर ऊर्जा चालित बाड़ से घेरकर गैंडों के लिए घर बनाया गया था। पहले असम से पांच गैंडे और इसके एक साल बाद नेपाल से चार मादा गैंडों को लाकर इसी विशाल बाड़े में रखा गया था। गैंडा पुनर्वासन योजना की सफलता के साथ ही गैंडों की आबादी में तेजी से बढ़ोतरी हुई। चार साल पहले दुधवा के ही बेलरायां रेंज में गैंडा पुनर्वासन योजना फेज-2 के तहत 14 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को सौर ऊर्जा चालित बाड़ से घेर कर गैंडों का नया घर बनाया गया था। इसमें फेज-1 से चार गैंडों को लाकर बसाया गया है। इसमें गैंडों की वंश वृद्घि शुरू हो गई है। मौजूदा समय में गैंडा पुनर्वासन योजना में कुल 44 गैंडे हैं। इनमें 37 गैंडे फेज-1 में और पांच गैंडे फेज-2 में हैं। फेज-2 में कुछ माह पहले एक शिशु का जन्म हुआ है।
दुधवा के गैंडों को आनुवंशिक दोष से बचाने के लिए बंगाल से कुछ और गैंडों को मंगाकर दुधवा के गैंडा परिवार में शामिल करने की योजना है। इसके लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर पर बंगाल राज्य से पत्राचार चल रहा है। हालांकि इन राज्यों से गैंडे मिलने में अभी कुछ समय लग सकता है।
- संजय पाठक, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व