दुधवा के जंगल में स्वछंद विचरण के लिए छोड़ी गई वयस्क मादा गैंडा। स्रोत-डीटीआर।
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व के गैंडा पुनर्वासन योजना से बृहस्पतिवार को दो गैंडों के छोड़े जाने के बाद उनकी निगरानी सेटेलाइट और उच्च वैज्ञानिक तकनीक के जरिये की जा रही है। वन कर्मियों की गठित दो टीमें उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही हैं।
पिछले 46 वर्षों से सौर ऊर्जा चालित बाड़ में रह रहे गैंडों को दुधवा के जंगल में आजाद करने के लिए आसाम से आए गैंडा विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ. केके शर्मा, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के डॉ. खनिन चंगमई, अनिल शर्मा के अलावा दुधवा के पशु चिकित्सक डॉ. दया शंकर, डॉ दीपक, डॉ. मोहम्मद तलहा शामिल रहे।
टीम ने पुनर्वासन योजना फेज वन से चिह्नित दो गैंडों को निकालकर स्वछंद विचरण के लिए जंगल में छोड़ा। एक नकुल नाम का नर गैंडा और हेमवती नाम की दूसरी वयस्क मादा शामिल है।
इससे पहले उन्हें बेहोश कर रेडियो कॉलर लगाया गया, जिससे उनकी लोकेशन पर नजर रखी जा रही है। यही नहीं रिहा किए गए गैंडों की निगरानी उच्च तकनीक से विकसित हाई फ्रीक्वेंसी एंटीना से हो रही है। सेटेलाइट से भी उन पर नजर रखी जा रही है। डीटीआर प्रशासन के मुताबिक छोड़े गए दोनों गैंडों की लोकेशन दक्षिण सोनारीपुर रेंज के एचडी सिंह रोड पर मिल रही है, जो गैंडा पुनर्वासन क्षेत्र से काफी नजदीक है।
पुनर्वासन योजना फेज वन से बृहस्पतिवार को दो और गैंडे जंगल में स्वछंद विचरण के लिए छोड़े गए हैं। इसके लिए वन कर्मियों की दो टीमें गठित की गई हैं। उच्च वैज्ञानिक तकनीक और सेटेलाइट के जरिये गैंडों की निगरानी की जा रही है।
- डॉ. एच राजामोहन, एफडी, दुधवा टाइगर रिजर्व