दुधवा में रेडिया कॉलर आईडी लगाकर छोड़ा गया गैंडा। स्रोत डीटीआर
पलियाकलां। दुधवा नेशनल पार्क में स्वच्छंद विचरण के लिए छोड़े गए गैंडों की लगातार निगरानी की जा रही है। ड्रोन कैमरों के साथ ही मचान के जरिये नजर रखी जा रही है। बाकी दुधवा मुख्यालय पर कंट्रोल रूम बनाकर कर्मियों को तैनात किया गया है।
सन् 1984 में दुधवा के सलूकापुर में 27 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में गैंडा पुनर्वास परियोजना शुरू की गई थी। जिसको फेज वन नाम दिया गया था। इसके बाद बेलरायां के छंगा नाले में फेज टू परियोजना में भी गैंडों को सौर ऊर्जा चालित बाड़ में रखा गया था। वर्तमान समय में इन दोनों फेजों में गैंडों की कुल संख्या 46 है और इसमें नौ नर, 22 मादा व 15 बच्चे शामिल हैं।
बीते दिनों इन्हीं में से पार्क प्रशासन ने रघु नामक नर गैंडे और विजयश्री व दीपाली मादा गैंडों को सौर ऊर्जा चालित बाड़ से आजादी देते हुए स्वच्छंद विचरण करने के लिए काॅलर आईडी लगाकर जंगल में छोड़ा है। इन गैंडों की निगरानी के लिए पार्क प्रशासन रेडियो काॅलर आईडी के अलावा ड्रोन कैमरों से भी बराबर नजर रख रहा है।
पार्क के उन निदेशक डाॅ. रंगाराजू टी. ने बताया कि गैंडों की लोकेशन जानने के लिए जंगल के बीच स्थित मचानों का सहारा लिया जा रहा है। यहां ड्रोन कैमरों को उड़ाकर उनकी स्थिति जानी जा रही है। बाकी दुधवा मुख्यालय पर कंट्रोल रूम बनाकर यहां कर्मियों को तैनात किया गया है।
करीब पांच कर्मियों के द्वारा 16 घंटे लगातार इनकी निगरानी की जा रही है और अन्य समय में ड्रोन समेत अन्य संसाधनों के जरिये उनपर नजर रखी जा रही है।
उनकी गतिविधियों का अध्ययन किया जा रहा है और उनके व्यवहार पर भी दुधवा पार्क प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है। जंगल में गैंडों के लिए उचित आवास, उसका उपयोग और उनकी जनसंख्या में वृद्धि के प्रयास करने के स्तर से पार्क द्वारा गैंडों को आजाद किया गया है।
दुधवा में रेडिया कॉलर आईडी लगाकर छोड़ा गया गैंडा। स्रोत डीटीआर