लखीमपुर खीरी। लखीमपुर, मैगलगंज, पलिया, संपूर्णानगर और कस्ता में अनंतनिधि क्रेडिट कोआपरेटिव सोसायटी के मालिकों द्वारा शाखाएं संचालित करके निवेशकों का लाखों रुपये जमा कराने के बाद भागने के मामले में अब तक सदर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है, जिससे एजेंट समेत निवेशकों में मायूसी छाई है। हालांकि सोशल मीडिया के जरिए निवेशकों और एजेंटों ने अपनी भड़ास निकालनी शुरू कर दी है, जिसमें सोसाइटी के निदेशक डॉ. राजेश त्रिवेदी को 500 करोड़ का लुटेरा और गरीबों के सपनों का हत्यारा बताया जा रहा है। यहां बता दें कि धोखाधड़ी का शिकार हुए लोगों में सबसे ज्यादातर लोग गरीब एवं मध्यम वर्गीय परिवारों से हैं।
अनंतनिधि क्रेडिट कोआपरेटिव सोसायटी को 31 जनवरी 2013 को भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ एग्रीकल्चर से मल्टी स्टेट कोआपरेटिव एक्ट 2002 के तहत उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान में काम करने के लिए रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मिला था। सोसायटी के मालिकों ने दिसंबर 2012 मेें पहला कार्यालय लखीमपुर में खोला था। सोसायटी का हेड ऑफिस लखनऊ के आलमबाग बस स्टैंड के सामने पुष्पा बजाज बिल्डिंग के प्रथम तल पर बनाया गया था। सोसायटी के बोर्ड में कुल 11 डायरेक्टर शामिल थे, जिसमें देशदीपक श्रीवास्तव अध्यक्ष और प्रद्युम्न सिंह उपाध्यक्ष बनाए गए थे, जबकि बोर्ड के डायरेक्टर गुंजन बाबू सक्सेना लखीमपुर की सभी पांचों शाखाओं की बागडोर संभाले थे। सोसायटी ने स्थानीय एजेंटों के माध्यम से कई सालों में करीब दो करोड़ रुपये जमा कराए और मौका मिलते ही फरार हो गए।
पीड़ितों ने सुनाई अपनी दास्तां
मितौली में चूड़ी की दुकान चलाकर जीवन यापन करने वाली सुमन जायसवाल ने अनंतनिधि सोसायटी में कई वर्षों की गाढ़ी कमाई 1.92 लाख रुपये जमा किए थे। अब पैसे की जरूरत है तो सोसायटी वाले भाग गए। एजेंट भी रुपये का भुगतान नहीं करा रहे हैं।
बस अड्डे पर पान की दुकान चलाने वाले चंद्रकांत शुक्ला ने सोसायटी में 36 हजार रुपये जमा किए थे। उन्होंने बताया कि बड़ी मेहनत से पैसे कमाए थे। अब सोसाइटी ने दफ्तर भी बंद कर दिया है। एजेंट भी नहीं मिल रहा है।
प्राथमिक विद्यालय के पास पान की दुकान चलाने वाले संजय पांडे ने सोसाइटी में 90 हजार रुपये जमा किए थे। सारी कमाई इसी में जमा करते रहे और अब पैसे पाने के लिए भटक रहे हैं।
मितौली कस्बे में जूता-चप्पल की दुकान करने वाले परवेज ने भी अच्छा ब्याज मिलने के लालच में आकर 36 हजार रुपये जमा किए थे। जब सोसायटी का दफ्तर बंद हुआ तो इन्हें इसके भागने की जानकारी हुई।
अभी हमारे पास आदेश की प्रति नहीं आई है, जिससे अभी रिपोर्ट दर्ज नहीं की जा सकी है। आदेश की प्रति मिलते ही इस मामले में मुकदमा दर्ज करके विवेचना प्रारंभ की जाएगी।
- सुनील कुमार सिंह, प्रभारी निरीक्षक, सदर कोतवाली