शहीद भगत सिंह नि:स्वार्थ सेवा समिति ने शहीदों की याद में कार्यक्रम ‘जरा याद करो कुर्बानी’ का आयोजन किया। संस्था के अध्यक्ष जसपाल सिंह पाली ने इस मौके पर बताया कि 14 फरवरी को ही सरदार भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी की सजा सुनाई गई थी। फांसी की सजा सुनते ही इन देशभक्तों में खुशी की लहर दौड़ गई।
उन्होंने बताया कि खुशी के कारण उनका वजन बढ़ गया। भगत सिंह ने अंग्रेज सरकार को एक पत्र भी लिखा। 23 वर्ष की उम्र में भगत सिंह तथा उनके साथी सुखदेव और राजगुरु को 23 मार्च 1931 को फांसी दे दी गई।
सरदार भगत सिंह नि:स्वार्थ सेवा समिति ने उन शहीदों को याद करते हुए उनके चित्र पर पुष्प अर्पित किए। संस्था के संस्थापक अध्यक्ष जसपाल सिंह पाली ने कहा कि आज युवाओं को इन क्रांतिकारियों के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। कार्यक्रम में सुशांत सिंह, नीरज सिंह, रवि तिवारी, राकेश कुमार, जसवीर सिंह, अनूप कुमार, धनंजय मिश्र, कृष्ण मुरारी तिवारी, अंकित, राहुल, सुशील गुप्ता आदि मौजूद रहे।