लखीमपुर खीरी। पिछले माह 25 नवंबर से देवोत्थान एकादशी से शुरू हुआ सहालगों का दौर बुधवार यानि आज से 14 जनवरी तक एक माह के लिए थम जाएगा, क्योंकि बुधवार सुबह 06:22 मिनट पर सूर्य भगवान गुरु की राशि धनु में प्रवेश करेंगे और 14 जनवरी तक इसी में रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र में इस अवधि को खरमास कहा जाता है। इसमें मांगलिक कार्यक्रम करना अशुभ माना जाता है। सूर्य भगवान के 14 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश करते ही फिर से मांगलिक कार्यक्रम का दौर शुरू हो जाएगा।
वैसे तो सहालग के लिए यह साल अच्छा नहीं रहा तो लॉकडाउन ने लोगों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। फिर, देवशयनी एकादशी से पांच माह के लिए मांगलिक कार्यक्रमों पर ब्रेक लग गया। इसके बाद 25 नवंबर को देवोत्थान एकादशी से शादी बरातों का दौर शुरू हुआ। मगर, कोरोना के कारण तमाम बंदिशों के बीच 22 दिन तक बैंड बाजा, बरात होने के बाद बुधवार यानि आज फिर से वैवाहिक कार्यक्रमों पर एक माह के लिए खरमास का ग्रहण लग रहा है। अब 14 जनवरी 2021 के बाद ही मांगलिक कार्यक्रमों का आगाज होगा।
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खरमास में करें सूर्य देवता की उपासना
स्वर्गीय श्रीमती चंद्रकला आश्रम एवं संस्कृत विद्यापीठ देवकली तीर्थ के आचार्य पंडित प्रमोद दीक्षित बताते हैं कि खरमास बुधवार से शुरू होकर 14 जनवरी तक रहेगा। सूर्य देवता के गुरु ग्रह की राशि धनु एवं मीन में प्रवेश करने से खरमास लगता है। बुधवार सुबह भगवान सूर्य, धनु राशि में प्रवेश करेंगे और करीब एक माह बाद 14 जनवरी को दिन के दो बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस अवधि को ज्योतिष शास्त्र में खरमास कहा जाता है। इसमें शुभ काम करना वर्जित रहता है। उन्होंने बताया कि खरमास में सूर्योदय से पहले उठकर सूर्यदेव की उपासना कर मंत्रों का जाप करें। साथ ही भगवान विष्णु का पूजन करना लाभकारी होगा। संवाद