मोहम्मदी पुवायां मार्ग पर चल रही ईंट भरी ट्रैक्टर ट्रॉली। संवाद
लखीमपुर खीरी। सड़कों पर ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रालियों से अक्सर हादसे होते हैं। यातायात व्यवस्था भी प्रभावित होती है, मगर हैरत की बात है कि परिवहन विभाग की नजर में व्यावसायिक पंजीकरण वाले ट्रैक्टर-ट्रालियों की संख्या महज 35 है। जबकि हजारों की संख्या में ऐसे वाहन दौड़ रहे हैं।
जिले में करीब 200 से अधिक ईंट भट्ठे हैं। प्रत्येक भट्ठे पर कम से कम चार ट्रैक्टर-ट्राॅली लगे हैं। अधिकांश वाहनों का व्यावसायिक पंजीकरण नहीं है। भट्ठा मालिक बिना पंजीकरण कराए ट्रैक्टर-ट्राॅली को सड़कों पर ईंटें ढो रहे हैं। इसके अलावा सैकड़ों की संख्या में सीमेंट, सरिया, टेंट आदि दुकानें हैं। प्रत्येक दुकान पर तीन ट्रैक्टर-ट्राॅली तक सामान ढोने के लिए लगे हैं। इनका भी व्यावसायिक पंजीकरण नहीं है।
बनते है हादसों की वजह
सड़कों पर जो हादसे हो रहे हैं, उनका एक बड़ा कारण ये ट्रैक्टर-ट्रॉलियां भी हैं। करीब 10 प्रतिशत ऐसे हादसे हैं, जिनमें ईंटा, बालू या फिर मिट्टी ढोने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली ही वजह होते हैं। बालू खनन में ऐसे ही ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का धड़ल्ले से प्रयोग किया जाता है।
कृषि कार्य में लगे ट्रैक्टर ट्राॅलियों का व्यावसायिक में पंजीकरण नहीं होता है। ईंट भट्ठा सहित अन्य संस्थानों में सामान ढोने के लिए लगे ट्रैक्टर ट्राॅलियों का व्यावसायिक पंजीकरण जरूरी है। प्रत्येक माह 20 से 25 ट्रैक्टर-ट्राॅली सीज किए जाते हैं। अब विशेष अभियान चलाया जाएगा।
-अखिलेश द्विवेदी, एआरटीओ
मोहम्मदी पुवायां मार्ग पर चल रही ईंट भरी ट्रैक्टर ट्रॉली। संवाद