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जिले में धान की रिकार्ड खरीद

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लखीमपुर खीरी। सरकारी धान खरीद अधिकारिक रूप से रविवार 31 जनवरी को बंद हो गई। खरीफ सीजन में सभी सातों एजेंसियों ने कुल 254890.23 मीट्रिक टन धान खरीदा है, जो लक्ष्य 2.05 मीट्रिक टन के सापेक्ष 124.34 प्रतिशत है। क्रय केंद्रों से राइस मिलों पर भेजे गए धान की कुटाई से तैयार सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) की डिलीवरी एफसीआई में कराई जा रही है। खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारी का दावा है कि 40965 किसानों से धान की खरीद की गई है, जो अभी तक का रिकार्ड है।
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खरीफ वर्ष 2020-21 में धान खरीदने के लिए आठ एजेंसियों खाद्य विभाग, पीसीएफ, पीसीयू, एनसीसीएफ, एसएफसी, मंडी समिति और एफसीआई ने 130 क्रय केंद्र खोले थे। सभी एजेंसियों को उनके केंद्रों के मुताबिक लक्ष्य आवंटित किए गए थे, जिसमें सबसे ज्यादा पीसीएफ ने 64423 मीट्रिक टन, खाद्य विभाग ने 72841 मीट्रिक टन और पीसीयू ने 63138 मीट्रिक टन धान खरीदा हैै।
विभाग का दावा है कि 40965 किसानों से धान खरीदा गया है, जिन्हें चार अरब 76 करोड़ 13 लाख 49 हजार रुपये भुगतान किया गया है, जबकि छह एजेंसियों पर किसानों का करीब 15 करोड़ रुपये बकाया है।
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एजेंसीवार धान खरीद (मीट्रिक टन में)
एजेंसी लक्ष्य खरीद
खाद्य विभाग 50000 72841.63
पीसीएफ 60000 64423.89
पीसीयू 52000 63138.86
एसएफसी 12000 20878.90
एनसीसीएफ 16000 17128.62
मंडी समिति 8000 8276.05
एफसीआई 7000 8202.29
पिछले वर्ष खरीदा था 207343.30 मीट्रिक टन धान
वर्ष 2019-20 में सरकारी एजेंसियों ने लक्ष्य 193000 मीट्रिक टन के सापेक्ष 207343.30 मीट्रिक टन (107 प्रतिशत) धान खरीदकर रिकार्ड बनाया था। जबकि वर्ष 2018-19 में लक्ष्य 193200 मीट्रिक टन के सापेक्ष 171427.916 मीट्रिक टन (88.73 प्रतिशत) धान खरीदा गया था।
मंडियों में घटी धान की आवक
इस वर्ष धान का अच्छा उत्पादन रहा, लेकिन मंडियों में धान की आवक कम रही। मंडी समिति राजापुर के सचिव सुधांशु कुमार ने बताया कि सभी पांच मंडियों में कुल 941875 क्विंटल धान की आवक हुई, जबकि पिछले वर्ष 1320701 क्विंटल धान की आवक हुई थी। उन्होंने बताया कि तिकुनिया और मोहम्मदी मंडी में जरूर आवक बढ़ी, लेकिन शेष मंडियों राजापुर, गोला, पलिया में आवक पिछले वर्ष से कम रही। आवक कम होने के कारणों के बारे में सचिव ने बताया कि किसानों ने क्रय केंद्रों के अलावा मंडी से बाहर ही धान बेच दिया। वहीं मंडी शुल्क से बचने के लिए कुछ आढ़तियों और राइस मिलर्स ने भी मंडी से बाहर ही किसानों से खरीद कर ली।
31 जनवरी को धान खरीद पूर्ण रूप से बंद हो गई, जिसके बाद अब सीएमआर की एफसीआई में डिलीवरी कराने पर जोर रहेगा। जिन एजेंसियों पर कुछ किसानों का भुगतान बकाया है, उनका शीघ्र भुगतान करा दिया जाएगा।
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- लालमणि पांडेय, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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