मन्योरा में मनी अवधी सम्राट बंशीधर शुक्ल की जयंती, कई साहित्यकार सम्मानित हुए
अवधि सम्राट पंड़ित बंशीधर शुक्ल की 112 वीं जयंती बुधवार को उनके पैतृक गांव मंन्योरा में बड़ी धूमधाम के साथ मनाई गई। इस मौके पर दूरदराज से आए कवियों ने बंशीधर शुक्ल के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हे श्रद्धांजलि दी। मां शारदे के चित्र के सामने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। मंच पर बंशीधर के पुत्र सत्यधर शुक्ल के निबंध संग्रह घसमंड का लोकार्पण किया गया। समारोह में कवियों और विद्वानों को समाज के प्रति उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
बाराबंकी से आए कवि डॉ. विनय दास, ओम नरायण गुप्त को अवधि वारिध पुरस्कार का सम्मान मिला। कवयित्री सुरचना त्रिवेदी, सुल्तानपुर के कवि ओम अनादि गुप्त को जनकवि बंशीधर शुक्ल सम्मान से नवाजा गया। कवि संजीव मिश्र, राजकिशोर पांडेय प्रहरी को रामभरोसे लाल पंकज सम्मान से सम्मानित किया गया। नंदलाल को जनपद गौरव सम्मान से नवाजा गया। इसके अलावा अन्य कई कवियों और विद्वानों को शाल ओढ़ा कर सम्मानित किया गया।
इसके बाद कवियों ने काव्यपाठ कर बंशीधर शुक्ल को श्रद्धांजलि दी। मधुकर सैदाई ने कहा-
लगी माघ की पंचमी आया तब ऋतुराज।
अमर धरोहर राष्ट्र की बंशीधर कविराज।।
पंकज शुक्ल ने कहा-वीणा वादिनी बजा दे मन के मधुर तार। कवयित्री डॉ. सुरचना त्रिवेदी ने कहा-चलगई-चलगई रे चुनाव की बयरिया, मतदान की ऋतु आई भैया, अवधि भाषा में पड़ते हुए चुनावी तसवीर पेश की। रामकुमार गुप्त ने अवधि में पढ़ा-अपने देशवा पर बहुतय गुमान। इसके अलावा समारोह में सुल्तानपुर से आए मथुरा प्रसाद जटायु, पुनीत कुमार, रायबरेली से सूर्य प्रसाद, कवि आद्या प्रसाद, जगमोहन मौर्य, कुलदीप समर, ज्ञानेंद्र शुक्ल, शविकांत मिश्र, रामकुमार गुप्त, संजीव मिश्र ब्योम, पूनम भार्गव, पंकज किशोर, चेतना, बंशीधर के प्रपौत्र गौरव शुक्ला आदि ने श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह का संचालन राजकुमार त्रिवेदी और अध्यक्षता अयोध्या प्रसाद जटायु ने की। इस अवसर पर कई कवियों को गजरानी देवी पुरस्कार, ब्रजेंद्र अवस्थी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। इस मौके पर कई कवि, विद्वान और ग्रामीण उपस्थित रहे।