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रामनगर और मुंजहा के किसान हुए मायूस

Fri, 10 Apr 2015 07:13 PM IST
तिकुनियां (लखीमपुर खीरी)।
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 तहसील निघासन की ग्राम पंचायत बनवीरपुर के मजरा गांव रामनगर और मुंजहा के किसान ओले गिरने और बारिश से नष्ट हुई फसलों का मुआवजा मिलने की बाट जोह रहे हैं। गेहूं और मसूर की फसल खेत में ही चौपट हो गई है। गांव के लोग मोहाना नदी कटान के साथ दोहरी मार झेलने को विवश हैं। डीएम की सख्ती के बाद तहसील से अधिकारी सर्वे के लिए आए, लेकिन वे नुकसान मानने को तैयार नहीं हैं, इससे किसान मायूस हैं।
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इंडो-नेपाल बार्डर पर बह रही मोहाना नदी के निकट किसानों के खेत हैं। किसानों ने ज्यादातर गेहूं और मसूर की फसल बोई थी। तराई इलाके और नदी के पानी के चलते यहां के खेतों में चार से पांच क्विंटल गेहूं और एक से डेढ़ क्विंटल मसूर और लाही की उपज हो जाती है। इस बार किसानों की फसल बहुत बढ़िया थी, लेकिन पिछले माह हुई लगातार तीन दिन की बारिश और तेज हवा के साथ ओले गिरने से फसलों पर बुरा प्रभाव पड़ा, जिससे उपज घटकर काफी कम हो गई। अब कर्ज और अन्य खर्चों में डूबे किसानों को चिंता है कि वह गृहस्थी का बोझ कैसे चलाएंगे। बार्डर के गांव कड़िया टांडा, इंदरनगर, रननगर, दाराबोझी, सूरतनगर, कौड़ियाला, जसनगर, बरसोला कलां, मंझरापूरब, खैरेटिया, उमरा, निबौरिया, लालापुर, भूलनपुर, के किसान बारिश में खेतों में तैयार खड़ी फसल के नष्ट होने से चिंता में हैं कि कैसे जीवन का निर्वाह होगा।

किसान बोले, सरकारी मशीनरी से मिली निराशा
तिकुनियां। ग्राम रामनगर निवासी विशंभर ने बताया कि मोहाना नदी कटान कर रही है तो बेमौसम की बारिश ने फसलें बर्बाद कर दी हैं, किंतु कहीं से कोई मदद नहीं मिली है। खेतों में लेखपाल भी नही पहुंचे हैं। ग्राम प्रधान जरूर आए। सत्यप्रकाश ने बताया कि उनका दो एकड़ गेहूं और एक एकड़ मसूर नष्ट हो गया। लेखपाल को सूचना दी है घर में बिटिया का ब्याह तथा बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी, यही चिंता सताए जा रही है। किसान मनोहरलाल बोले-बताई भइया आठ बीघा मसूर, सात बीघा गेहूं, बारिश में चला गवा कोई अबहीं देखय नाय आवा। एहे केरि चिंता घर मां बनी है कि अब का खइबा औ खर्च कइसे चली। कन्हैया ने कहा कि इस बार छह बीघा गेहूं की फसल खूब बढ़िया रहय पर बरबाद हुई गई। सभी किसानों को कहना है कि सरकारी मशीनरी ने सर्वे ठीक से किया होता तो उन्हें मदद मिल जाती।
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प्रधान बोले, 75 फीसदी तक बर्बाद हो गई फसल
ग्राम पंचायत बनवीरपुर के प्रधान राजकुमार विश्वकर्मा ने कहा कि उनकी पंचायत में 50 से 75 फीसदी तक फसल बारिश में बर्बाद हो गई है। लेखपालों ने पहले सर्वे किया, जिसमें नुकसान नहीं निकला, अब फिर से सर्वे कर रहे हैं। उम्मीद है कि किसानों को लाभ मिलेगा।

गांवों में पुन: सर्वे कराया गया है, जिसमें पात्र किसानों को मुआवजे का लाभ मिल रहा है। सर्वे की क्रॉस चेकिंग हो रही है, किसी भी पात्र को वंचित नहीं होना पड़ेगा।
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-हरिकेश चौरसिया, एडीएम
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